करतारपुर कॉरिडोर: 31 अक्टूबर तक प्रोजेक्ट पूरा कर लेगा भारत, पाकिस्तान की तरफ काम धीमा

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नई दिल्ली: भारत करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण जल्द से जल्द चाहता है. केंद्र सरकार की कोशिश है कि गुरु नानक देव की 550वीं जन्मशती से पहले-पहले तक करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण हो जाए, जिससे की आसानी से श्रद्धालु गुरु नानक देव का दर्शन कर सकें. भारत की तरफ से हाईवे का काम 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है. यात्री टर्मिनल के निर्माण का काम भी काफी तेजी से चल रहा है. भारत की तुलना में पाकिस्तान के इलाके में काम धीमी गति से चल रही है.

भारत पूरे प्रोजेक्ट को इस साल के 31 अक्टूबर तक पूरा करना चाहता है. पूरे प्रोजेक्ट पर भारत करीब 500 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. सूत्रों ने बताया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच करतापुर कॉरिडोर को लेकर कई मतभेद भी हैं.

भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वह रावी नदी पर एलिवेटेड रोड बनाए क्योंकि इस इलाके में बाढ़ का खतरा बना रहता है. इसपर पाकिस्तान अभी तक सहमत नहीं हुआ है. पाकिस्तान सिर्फ पक्की सड़क बनाने पर सहमत हुआ है

अभी तक यात्रा के तौर-तरीकों पर भी भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत नहीं हुई है. भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच 14 जुलाई को बैठक होगी. इस दौरान इसपर चर्चा की जाएगी. भारत के लिए इस पूरे प्रोजेक्ट में सुरक्षा एक बड़ा मसला है. पूरे कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए हाईटेक सर्विलेंस सिस्टम लगाए जाएंगे.

आपको बता दें कि विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि भारत करतारपुर साहिब गलियारा परियोजना के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और तेजी से इसका काम पूरा करना चाहता है.

भारत की तरफ से यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब मीडिया का एक धड़ा यह बता रहा है कि करतारपुर गलियारा के निर्माण में भारत पिछड़ रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘हम इस परियोजना को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं.’’

उन्होंने कहा कि सरकार लोगों और करतारपुर साहिब के तीर्थयात्रियों की भावना से परिचित है. कुमार ने कहा कि आर्ट पैसेंजर टर्मिनल और चार लेन वाला वह राजमार्ग जो करतारपुर गलियारे के जीरो प्वाइंट को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ेगा, उसका निर्माण समय पर पूरा हो जाएगा.

बाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से 14 जुलाई को बैठक आयोजित होगी. उन्होंने कहा कि वार्ता की इच्छा मूल रूप से इस बात पर आधारित है कि इसको लेकर जो कुछ भी मतभेद है, उस पर पाकिस्तान के साथ बातचीत की जाए.

इससे पहले भारत ने गलियारे पर पाकिस्तान द्वारा नियुक्त कमेटी में कई खालिस्तानी अलगाववादियों की मौजूदगी पर अपनी चिंताओं से पाक को अवगत कराया था.

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