मैं प्लेन और हेलिकॉप्टर उड़ाता हूं, 60 के दशक और आज की कारें कलेक्ट करता हूं ताकि उन्हें जान सकूं: रतन टाटा

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81 साल के देश के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी रतन टाटा ने समाजसेवा, बिजनेस, संगीत, फिल्म और खेल के अलावा अपनी जिदंगी के बारे बातचीत की

मुंबई. टाटा समूह को शीर्ष पर पहुंचाने वाले रतन टाटा 81 साल के हो चुके हैं। अपनी संपत्ति का 65% से अधिक हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और गांवों के लिए दान कर चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद भी व्यस्त हैं। समाजसेवा और बिजनेस के अलावा कारों का कलेक्शन कर रहे हैं। विमान और हेलिकाॅप्टर उड़ाते हैं। साथ ही संगीत, फिल्म और खेल का आनंद ले रहे हैं। उनसे बातचीत के संपादित अंश…

सवाल- बिजनेस और समाजसेवा के अलावा अब और क्या-क्या कर रहे हैं? किन चीजों में व्यस्त हैं?
जवाब- मुझे कारों से बहुत लगाव है और मैंने उन्हें कलेक्ट करना भी शुरू कर दिया है। 

सवाल- पुरानी और एंटीक्स कारें या नई भी…
जवाब- नहीं-नहीं! 60 के दशक की कारें और आज की कारें। खासतौर पर उनकी स्टाइलिंग और उनके मैकेनिक्स के प्रति मेरा गहरा रुझान है। इसीलिए मैं उन्हें खरीदता हूं, ताकि उन्हें पढ़ सकूं। हां, मैं आज भी कंपनी के प्लेन उड़ाता हूं। हेलिकॉप्टर भी उड़ाता हूं। इनका उपयोग मैं पुणे जाने के लिए करता हूं। एविएशन टेक्नोलॉजी में भी मेरा गहरा रुझान है।   

सवाल- क्या कोई खेल देखना पसंद करते हैं?
जवाब- मुझे फुटबॉल, टेनिस और गोल्फ देखना पसंद है, लेकिन सिर्फ टीवी पर। ईमानदारी से कहूं तो ज्यादातर वक्त मैं नहीं जानता कि कौन खेल रहा है। मैं सिर्फ खिलाड़ियों की खेल क्षमताओं का आनंद लेता हूं। पूछेंगे कि कौन खेल रहा है, तो मुझे कोई जानकारी नहीं होती। 

सवाल- जब आप जेआरडी टाटा के उत्तराधिकारी बने तो इस विरासत में आपको क्या ताकतें दिखीं?
जवाब- टाटा ग्रुप में एथिक्स और वैल्यू पर बहुत जोर था। अगर यह नहीं होता तो हम अलग-अलग दिशाओं में चले जाते। हम जहां भी थे, आत्म-गौरव का भाव था। दुर्भाग्य से टाटा ग्रुप में सब एक साथ नहीं थे, यह एक समस्या थी।

सवाल- हमने कहीं सुना था कि आपकी शादी पांच बार होते-होते रह गई?
जवाब- चार बार। एक बार तो शादी हो ही गई होती, जब मैं यूएस में था। पर, मेरी दादी ने मुझे अचानक फोन करके बुला लिया और उसी समय भारत का चीन से युद्ध छिड़ गया और इस तरह मैं यहीं अटक गया। उस लड़की की शादी हो गई। बाद में पता चला उनके पति की मृत्यु हो गई। कुछ साल पहले मैं बॉम्बे हाउस ऑफिस में बैठा था, जब एक व्यक्ति ने पर्ची दी यह कहकर कि पेरिस में एक महिला ने मुझे देने के लिए दी है। यह पर्ची उसी लड़की की थी। उनका अपना एक परिवार है, बच्चे भी हैं। दुनिया कितनी छोटी है। एक समय था जब हमारा कोई संपर्क नहीं था पर आज हम दोस्त के तौर पर मिल लिया करते हैं।

सवाल- क्या आपके घर में डॉग्स हैं? 
जवाब- हां, मेरे घर पर दो जर्मन शेफर्ड हैं। हम नवी मुंबई में डॉग्स के लिए अस्पताल बनवा रहे हैं। कोलाबा के यूएस क्लब में 20 से ज्यादा डॉग्स को मैं खुद खिलाता था। यह सिलसिला तब तक चलता रहा, जब एक दिन मुझे पता चला कि उन्हें जहर देकर मार दिया गया है। उसके बाद से आज तक मैंने उस क्लब में कदम तक नहीं रखा है। 

सवाल- आपके पसंदीदा पेंटर कौन हैं? 
जवाब- लक्ष्मण श्रेष्ठ उनमें से एक हैं। अकबर पद्मसी भी पसंद हैं। लेकिन, मेरे पास उनकी एक-दो पेंटिंग्स ही हैं। कलाकृतियां खरीदना महंगा हो गया है। अब मैं इन्हें अफोर्ड नहीं कर सकता। 

सवाल- आपको किस किस्म का संगीत पसंद है?
जवाब- 60 और 70 के दशक का संगीत मुझे पसंद है। जैसे बीटल्स। पर, मुझे बड़ी संतुष्टि होगी अगर मैं शास्त्रीय संगीत बजा पाऊं। मुझे शॉपेन पसंद है। सिम्फनी भी अच्छी लगती है। बिथोवन, चेकोस्की पसंद हैं। पर कहीं न कहीं मुझे लगता है कि काश मैं खुद इन्हें पियानो पर बजा सकूं।

सवाल- क्या आप कभी फिल्में देख पाते हैं?
जवाब- थियेटर में नहीं। पर हां, घर पर टीवी पर देखता हूं। पर नाम याद करने को मत कहना। मैं जोर देकर एक किताब ‘द आर्ट ऑफ रेसिंग इन द रेन’ पढ़ने को कहूंगा। मैंने पांच बार पढ़ी है और हर बार मेरी आंखें नम हुई हैं। 

सवाल- आपने ग्रुप की समस्या का क्या हल निकाला ? 
जवाब- मैंने ग्रुप की सभी कंपनियों को एक लोगो, एक ब्रांड के दायरे में लाने की कोशिश की।

सवाल- इससे आपके कुलीग्स को समस्या हुई होगी…
जवाब- दरअसल, समस्या इस लिहाज से थी कि सभी को टाटा संस के दायरे में लाना था, जबकि वह कई वर्षों से खुद ही अपने बॉस थे। कुछ मायनों में उनकी नाराजगी रही होगी। अच्छी बात यह थी कि बदलाव लाने में जेआरडी मेरे साथ थे। हालांकि यह उनके बाद हो सका।

सवाल- आपकी टाटा में प्राथमिकता ब्रांड बना, व्यक्ति-प्रोडक्ट या नया बिजनेस नहीं?
टाटा स्टील में मैं एक युवा के रूप में शॉप फ्लोर से आया था। मैंने वह स्थितियां भी देखी थीं कि जब टाटा स्टील, टाटा इंजीनियरिंग से बात नहीं करता था। टाटा इंजीनियरिंग, टाटा केमिकल से बात नहीं करता था। यह बेकार बात थी। टाटा-टी को कोई ऐसी चीज खरीदनी होती जो टाटा इंजीनियरिंग दे सकता था, फिर भी टाटा-टी इसके लिए बाहर देखती थी। इस तरह हम बहुत सारे अवसर गंवा रहे थे, क्योंकि हम एक नहीं थे। जब एकीकरण हो गया, तब अधिकांश कंपनियां एक साथ आ गईं और एक-दूसरे को टाटा ग्रुप के तौर पर पहचानने लगीं। वह संयुक्त राजस्व, आकार और लाभ के बारे में बात करने लगीं।

सवाल- आपके अनुसार भविष्य का बिजनेस क्या होगा या टाटा को कहां इन्वेस्ट करना चाहिए?
जवाब- यह मुश्किल सवाल है। अगर आप हमारे बड़े व्यवसायों को देखेंगे तो स्टील इसमें से कभी हट नहीं पाएगा। यह हमेशा इंडस्ट्री की बुनियाद रहेगा। अलग-अलग दौर में यह अर्थव्यवस्था की तरक्की या गिरावट से जुड़ा रहेगा। स्टील को कभी भी रबर, लकड़ी या एल्युमिनियम से बदला नहीं जा सकता। इसी तरीके से यातायात का कोई विकल्प नहीं हो सकता है। हालांकि इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा के कारण इसमें व्यापार कठिन होता जाएगा।
 

सवाल- यातायात से क्या आपका आशय कार और एविएशन बिजनेस से है?
जवाब- नहीं। मैं सड़क परिवहन की बात कर रहा हूं। करीब-करीब दुनिया की हर कार कंपनी भारत में है। इसलिए प्रतिस्पर्धा है। पर हमें आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए, बल्कि इनसे बेहतर होने की कोशिश करनी चाहिए। कभी हम इसमें नंबर दो हुआ करते थे, आज हम नंबर पांच पर हैं। हमें ये पूछना होगा कि हम ऐसा क्या करें कि हम अपनी पुरानी मार्केट पोजिशन को दोबारा हासिल कर सकें।

सवाल- आज की फॉन्ग (FAANG) इकोनाॅमी, जिसमें फेसबुक, अमेजन, एपल, नेटफ्लिक्स और गूगल हैं, क्या उसमें आपको होना चाहिए था? 
जवाब- मुझे नहीं लगता हम इस क्षेत्र में हो सकते थे। मुझे लगता है कि किसी भी भारतीय कंपनी का इस क्षेत्र में होना बहुत मुश्किल होता क्योंकि हमारे पास इस क्षेत्र में सफल होने की  मानसिकता नहीं हो सकती थी। 

सवाल- क्या आपके संस्थान में स्टार्टअप्स की जगह है?
जवाब- हां, जगह तो है। पर मुझे नहीं लगता कि हमारे पास ऐसे लोग हैं जो इस जगह को भर सकें। सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज ने कॉलेज से निकलते ही गूगल के बारे में सोचा था, क्या ये हिंदुस्तान में हो सकता है, मुझे संदेह है।

सवाल- क्या आपकी मानसिकता आपको परंपरागत क्षेत्रों में ही रोककर रखती है? 
जवाब- हमारी मानसिकता दूसरी कंपनियों जैसे जनरल मोटर्स, जनरल इलेक्ट्रिक्स, ऑटोमोबाइल्स और स्टील कंपनियों से अलग नहीं है। दूसरे क्षेत्रों में जाना वैसा ही है जैसे कि किसी बैंक को कहा जाए कि वह एक ब्लॉक और चेन कंपनी बन जाए, ऐसा नहीं हो सकता। ये शायद संभव है कि हमारी कुछ नई कंपनियां ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ सकती हैं, जो नई मानसिकता लेकर आएं जिसकी मदद से नए क्षेत्रों में जाने के बारे में सोचा जा सके। 

(यह इंटरव्यू हार्पर कॉलिन्स की आगामी किताब पीअरलैस माइंड्स से खासतौर पर भास्कर के पाठकों के लिए। किताब प्रीतीश नंदी और तपन चकी ने संपादित की है।) Ratan tata

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