ऋतिक रोशन बोले, गोली मारने की धमकी मिलती तो भी सुपर थर्टी जैसी इंस्पायरिंग फिल्म नहीं छोड़ता

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बॉलीवुड डेस्क. काबिल के तकरीबन दो साल बाद ऋतिक रोशन ने अपने चाहने वालों को सुपर 30 के रूप में एक यादगार सौगात दी है। दिलचस्प बात यह रही कि सुपर 30 ऋतिक की सिग्नेचर फिल्मों की तरह टिपिकल एक्शन पैक्ड न होने के बावजूद दिलों पर छाप छोड़ गई। सुविधाविहीन छात्रों को मुफ्त पढ़ाने वाले एक टीचर आनंद कुमार के रोल ने उन्हें स्क्रीन पर लार्जर दैन लाइफ की एक नई इमेज प्रदान की है। दर्शकों को तो वे इस अवतार में खासे पसंद आए ही, वाइस प्रेसिडेंट और अन्य गणमान्य लोगों ने भी उनकी परफॉरमेंस की सराहना की। फिल्म 15 दिनों में वह तकरीबन 120 करोड़ का कलेक्शन कर चुकी है। अपने करियर की इस खास फिल्म के बारे में ऋतिक ने दैनिक भास्कर से अपने जज्बात साझा किए।

मैंने वो फिल्में की जिनकी कहानी ने मेरे दिल को छू गई

    • सुपर 30 जैसी बेहद इंस्पायरिंग स्टोरी के लिए मुझे उन लोगों से भी मुबारकबाद मिली हैं, जिनका बतौर इंसान और कलाकार मैं खुद कायल रहा हूं। इन तारीफों से मेरा हौसला और बुलंद हुआ है। जब सुपर 30 की स्क्रिप्ट मेरे पास आई तो वह मुझे इतनी पसंद आई कि मैं क्या कहूं? झट तय कर लिया कि यह प्रेरित करने वाली फिल्म तो मुझे करनी ही है। तब अगर कोई मुझे गन पॉइंट पर लेकर कहता कि इसे करने पर तुम्हें गोली मार दी जाएगी, तो भी मैं किसी की नहीं सुनता और यह फिल्म करता। सोच सकते हैं कि इस फिल्म की कहानी ने मुझ पर कैसा गहरा असर डाला था।
    • मैंने अपनी जिंदगी में हमेशा वो फिल्में की हैं, जिनके सब्जेक्ट ने मुझे टच किया। कहो ना प्यार है के साथसाथ मैंने एक फिल्म साइन की थी, जिसका नाम था फिजा। वह भाई-बहन के रिश्ते के ऊपर फिल्म थी। कहो ना प्यार है जैसी हिट लव स्टोरी के बाद कोई वजह नहीं थी कि मैं फिजा जैसी स्क्रिप्ट को हां कहूं। फिर भी मैंने वह फिल्म की, क्योंकि उसकी कहानी ने मुझे टच किया था। मैंने कोई मिल गया जैसी फिल्म भी की, जिसमें मैंने अपने एक्शन अवतार की इमेज को तोड़कर मेंटली चैलेंज्ड किड का किरदार प्ले किया था। तब लोगों ने मुझे वह रोल करने से मना किया था।
  1. टैक्स फ्री होने के बाद ज्यादा लोगों तक पहुंची फिल्म: ऋतिक
    • क्योंकि उससे ठीक पहले मेरी दो-तीन फिल्में चली भी नहीं थीं। न तुम जानो न हम, आप मुझे अच्छे लगने लगे और मैं प्रेम की दीवानी हूं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थीं। लोगों ने तो यह तक कह दिया था कि अब तो ऋतिक की पार्टी ओवर हो गई है। ऐसी स्थिति में मेरे सामने कोई मिल गया आई थी। उसकी कहानी ने मेरे दिल को इतना छुआ कि मैंने तय कर लिया कि मुझे यह फिल्म करनी ही है। जब वह सक्सेसफुल हुई तो मेरा खुद पर और अपने दिल की आवाज पर कॉन्फिडेंस काफी गहरा हो गया। उस फिल्म की सक्सेस सुपर 30 जितनी नहीं, तो उससे कम भी नहीं थी।
    • बहरहाल उस समय ही मैंने उसूल बना लिया कि आगे से जो भी कहानी दिल को छुएगी, चाहे वह सो कॉल्ड स्टार वैल्यू वाली हो या नहीं, मुझे वह करनी ही है। लिहाजा, जब सुपर 30 आई तो झट तय कर लिया कि यह तो करनी ही है।  सबसे बड़ी बात तो यह है कि ऐसी फिल्में विकास और जन जागरुकता की ओर ध्यान केंद्रित करती हैं। इस तरह की फिल्मों को जब जनता, सरकार, सिस्टम और बदलाव लाने में सक्षम अथॉरिटी रखने वालों से भी सपोर्ट मिलता है तो वाकई बहुत अच्छा लगता है। इसे टैक्स फ्री करने वाले सारे चीफ मिनिस्टर और वाइस प्रेसिडेंट का मैं शुक्रगुजार हूं। टैक्स फ्री होने से यह ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएगी और उन्हें इंस्पायर करेगी। बदलाव लाने की क्षमता में इस फिल्म के जरिए खासा इजाफा होने वाला है।

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