हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत का ग्राफ गिरना चिंता की बात- चीफ जस्टिस गोगोई

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दिल्ली: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हैप्पीनेस क्लास के एक साल पूरा होने पर ‘हैप्पीनेस उत्सव’ का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पहुंचे. दिल्ली सरकार द्वारा यह कार्यक्रम बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाने और तनाव से दूर रहने के लिए चलाया गया. कार्यक्रम में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि भारत हैप्पीनेस इंडेक्स में पहले 133वे स्थान पर था जो कि अब 147वां हैं. ये एक नंबर मात्र नहीं बल्कि चिंता की बात है.

उन्होंने कहा, ”मैं बहुत खुश हूं कि इस बड़े दिन पर आपके साथ हूं. हजारों स्कूलों में पढ़ रहे लाखों छात्रों को यह बताना चाहूंगा कि खुशी वह चीज है जिसको हम हमेशा पाना चाहते हैं लेकिन ज्यादातर समय हम खुश नहीं रह पाते. खुशी एक सकारत्मकता है. खुशी खरीदी नहीं जा सकती लेकिन यह एक एहसास है जिसको पाया जा सकता है. बच्चों को नैतिक मूल्य सीखाना और उन्हें खुश रहने की शिक्षा देना बहुत अच्छी पहल है. मेरी समस्या यह है कि मेरे बहुत से केस हैं लेकिन अगर वो नहीं होंगे तो मैं खुश रहूंगा. बिना खुशी के शिक्षा कभी पूरी नहीं हो सकती है.”

कार्यक्रम में उपराज्यपाल अनिल बैजल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे. इसके साथ ही मध्यप्रदेश, मणिपुर, मिजोरम समेत कुछ राज्यों के शिक्षा मंत्री भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 70 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि देश के मुख्य न्यायाधीश कभी इस तरह से देश के सरकारी स्कूल के शिक्षकों और बच्चों के बीच उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उनके बीच आए हों.

उन्होंने कहा, ”दिल्ली सरकार आज अपने बजट का 25 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च कर रही है. सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर दिया जा रहा है. दूसरे देशों में दिल्ली के स्कूलों के प्रिंसिपल को ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है. जिसका नतीजा ये रहा कि इस बार नतीजा 92 प्रतिशत रहा. अब इस तरह से पूरे देश के सरकारी बच्चों का रिजल्ट ऐसा ही होना चाहिए और सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बदलना चाहिए. हैप्पीनेस करिकुलम ने बच्चों को उत्साहित किया है. दूसरे राज्यों के अंदर जो अच्छे काम हो रहे हैं वो हमें सीखना चाहिए और हमारे यहां जो अच्छे काम हो रहे हैं वो दूसरे राज्यों की सरकारों को सीखना चाहिए.”

मनीष सिसोदिया ने हैप्पीनेस क्लास की तारीफ में कहा कि पहले बच्चों में प्रतियोगिता के चलते एक दूसरे से जलन, ईर्ष्या आ जाती थी, लेकिन अब इन क्लासों के बाद बच्चों में परिवर्तन आया है. अब वे किसी को आगे बढ़ता देख जलते नहीं बल्कि उससे प्रेरणा लेते हैं. बच्चे कच्ची मिट्टी के बने होते हैं और उन्हें जैसा बनाया जाए वो बन जाते हैं.

अनिल बैजल ने बताया कि भारत का हैप्पीनेस लेवल लगातार गिर रहा है और कई सारे अमीर देशों में भी यही हाल है. जो कि बयां करता है कि आप खुशी खरीद नहीं सकते. शिक्षा और खुशी एक दूसरे से जुड़े हैं और एक को पाने से दूसरे की प्राप्ति होती है. आशा है कि नए नए आईडिया से और भी कई बदलाव आने वाले दिनों में दिखे.

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