हर एटीएम से 130 ट्रांजैक्शन, लेकिन सरकारी बैंकों ने खर्च बढ़ने की वजह से 10,800 मशीनें बंद कर दीं

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नई दिल्ली. 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था। उसके बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन अब धीरे-धीरे बाजार में नकदी बढ़ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश में एटीएम का इस्तेमाल करने वाले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी बैंक एटीएम की संख्या घटा रहे हैं। वहीं, निजी बैंकों के एटीएम बढ़ते जा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में सरकारी बैंकों ने 10,809 एटीएम बंद किए। वहीं, निजी बैंकों ने इस दौरान 3,975 नए एटीएम लगाए। टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और कैश को लेकर आरबीआई के नए नियमों की वजह से एटीएम का खर्च बढ़ा है। ऐसे में सरकारी बैंकों को एटीएम बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

सरकारी बैंकों के एटीएम 7% घटे, निजी बैंकों के इतने ही बढ़े

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2017 में देश में कुल दो लाख 21 हजार 553 एटीएम थे। मार्च 2019 तक इनकी संख्या बढ़कर दो लाख 21 हजार 703 हो गई। सरकारी बैंकों के एटीएम जितने घटे हैं, उतने ही निजी बैंकों के एटीएम बढ़े हैं।

सरकारी बैंक एटीएम की संख्या क्यों घटा रहे हैं 

  • भारत में एटीएम इंडस्ट्री की संस्था कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) के मुताबिक एटीएम की सर्विसिंग, मेंटेनेंस और अपग्रेडिंग का खर्च काफी महंगा हो गया है। दरअसल, हाल ही में आरबीआई ने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड, कैश मैनेंजमेंट स्टैंडर्ड्स और कैश लोडिंग मैथड को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। इस वजह से एटीएम का संचालन महंगा हो गया है। 
  • बैंकिंग विशेषज्ञ एसएसए काजमी ने भास्कर एेप को बताया कि बैंकों के लिए एटीएम का मेंटेनेंस काफी महंगा होता है। आम तौर पर एक एटीएम से प्रति दिन 150 से 200 ट्रांजैक्शन होने पर ही बैंक अपनी लागत वसूल पाते हैं। इससे कम ट्रांजैक्शन पर एटीएम चलाना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह उस इलाके में बैंक के ग्राहकों की संख्या पर भी निर्भर करता है। दूसरी तरफ एटीएम ऑपरेटर्स की सुरक्षा लागत भी बढ़ी है। वे मुख्य तौर पर इंटरचेंज फीस यानी क्रेडिट या डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मिलने वाले चार्ज पर निर्भर करते हैं, जो करीब 15 रुपए है। इसमें लंबे वक्त से बदलाव नहीं हुआ है। ऑपरेटर्स इसमें इंडस्ट्री कमेटी की मंजूरी के बिना बढ़ोतरी भी नहीं कर सकते।
  • आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने एटीएम के खर्च और अन्य वजहों से यह कदम उठाया है। इसमें सबसे ज्यादा सरकारी बैंकों की तरफ से एटीएम बंद किए गए हैं। इसके पीछे तेजी से बढ़ती डिजिटल बैंकिंग भी एक वजह है। हालांकि, एटीएम के मेंटेनेंस में आने वाला भारी भरकम खर्च भी इसके पीछे की एक बड़ी वजह है। इसके जरिए बैंक अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में डेढ़ साल में ज्यादा संख्या में सरकारी बैंकों के एटीएम बंद हुए। इनकी जगह निजी बैंकों ने सबसे ज्यादा एटीएम खोले।

नए नोटों की वजह से 3,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा था

कैटमी के मुताबिक, नोटबंदी के बाद से 2000, 500, 200 और 100 रुपए के नए नोट चलन में हैं। इन नोटों का साइज भी पुराने नोटों से अलग है। लिहाजा, नए नोटों के लिए एटीएम के खाचों (कैसेट) को बदला गया। इस वजह से एटीएम इंडस्ट्री पर करीब 3,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। अब फिर नए बदलावों की वजह से एटीएम लगाना महंगा हो गया है।

देश में प्रति एक लाख आबादी पर 22 एटीएम, ब्रिक्स देशों में सबसे कम

एटीएम लगाने के मामले भारत ने भले काफी प्रगति की है, लेकिन आबादी के लिहाज से इन्हें लगाए जाने की दर काफी कम है। ब्रिक्स देशों की बात करें, तो भारत इनमें सबसे पीछे है। भारत में प्रति एक लाख आबादी पर एटीएम की संख्या ब्रिक्स देशों में सबसे कम है। हमारे यहां इतनी आबादी पर सिर्फ 22 एटीएम हैं, यानी एक एटीएम पर करीब 4,545 लोग निर्भर हैं। 2012 में एक एटीएम पर 10,832 लोग निर्भर थे। हालांकि, 2012 से 2017 के बीच इसमें दोगुनी बढ़ोतरी होने से निर्भरता का आंकड़ा घटा है। ब्रिक्स देशों में प्रति एक लाख आबादी पर एटीएम की संख्या के मामले में रूस अव्वल है। वहां प्रति एक लाख आबादी पर 164 एटीएम हैं, यानी 609 लोगों पर एक।

सरकारी योजना के पैसे खाते में सीधे आने की वजह से भी एटीएम की जरूरत बढ़ी

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से करीब 36 करोड़ लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। केंद्र ने सरकारी योजना के पैसे इनके खातों में सीधे भेजने (डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर) की व्यवस्था की है। इस वजह से भी एटीएम की जरूरत और इस्तेमाल बढ़ा है। 

इन पर पड़ेगा एटीएम बंद होने का सबसे ज्यादा असर

विशेष तौर पर सरकारी बैंकों के एटीएम बंद होने का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों की एक बड़ी आबादी पर पड़ेगा। खास तौर पर समाज के निचले तबके पर, क्योंकि इसका अधिकतर हिस्सा सरकारी बैंकों पर निर्भर है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं की रकम सीधे खाते में आने की वजह से भी ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम पर ट्रांजैक्शन बढ़ रहा है। जानकारों के मुताबिक, एटीएम ऑपरेटर्स की सुरक्षा लागत बढ़ी है। वे मुख्य तौर पर इंटरचेंज फीस यानी क्रेडिट या डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मिलने वाला चार्ज पर निर्भर करते हैं जो करीब 15 रुपए है। इसमें वे इंडस्ट्री कमेटी की मंजूरी के बिना बढ़ोतरी नहीं कर सकते।

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