इनोवेशन /दूर या पास की चीजें देखने के लिए बस पलक झपकानी होगी, शोधकर्ताओं ने बायोमीट्रिक लेंस बनाए

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लाइफस्टाइल डेस्क. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने खास किस्म के लेंस तैयार किए हैं जिसकी मदद से पलक झपकते ही दूर या पास की चीजों को स्पष्ट देखा जा सकेगा। शोधकर्ताओं ने इसे बायोमीट्रिक लेंस का नाम दिया है। दावा है कि ये लेंस खासतौर पर उनके लिए बेहतर साबित होंगे, जिनकी दृष्टि बेहद कमजोर है और चश्मा पहनना मजबूरी है। फिलहाल इस लेंस का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है।

इलेक्ट्रो-एक्टिव पॉलिमर फिल्म से तैयार किए गए लेंस

  1. शोधकर्ताओं के मुताबिक, दूर या पास की चीजें देखने के लिए बस आंखों का मूवमेंट बदलना होगा। यह देखने में सामान्य लेंस जैसा ही है। इसमें आर्गनिक टिश्यू की जगह इलेक्ट्रो-एक्टिव पॉलिमर फिल्म का प्रयोग किया गया है। इसमें खास किस्म में तार का इस्तेमाल किया गया है जो करंट पैदा करते हैं। इससे लेंस को फैलने और सिकुड़ने में मदद करती है।
  2. दो बार आंखों को झपकाने पर दूर और ऐसा दोबारा करने पर पास की चीजों को स्पष्ट देखा जा सकेगा। इंसान और जानवर जिस तरह पास और दूर की चीजें देखते है, बायोमीट्रिक लेंस को उसी तर्ज पर तैयार किया गया है। इस लेंस का इस्तेमाल भविष्य में आंखों में अपने आप जगह बनाने और रोबोटिक आई के तौर पर भी किया जा सकेगा।
  3. शोधकर्ताओं का कहना है, लेंस को इंसान तक पहुंचने से पहले कई और प्रयोगों से गुजरना होगा। हमारी रिसर्च जारी है। 2014 में सर्च इंजन गूगल ने भी स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस पर काम करना शुरू किया  था। यह लेंस लगाने वाले मधुमेह रोगियों के आंसू से ही ग्लूकोज का स्तर जांच लेता था। हालांकि 2018 में इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी गई थी।

शोधकर्ता शेंगकियांग काई का कहना है कि आंखों के मूवमेंट (पलकें झपकाना) में सिग्नल देने की ताकत होती है। जब आप नींद में होते है तब भी आपकी आंखों में इलेक्ट्रोऑक्यूलोग्राफिक क्षमता होती है। जब आप कुछ भी नहीं देख रहे होते हैं तब भी कुछ लोग अपने आंखों की पुतलियों का मूवमेंट कर इलेक्ट्रोऑक्यूलोग्राफिक सिग्नल जनरेट कर रहे होते हैं।

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