खत्म हुआ जम्मू कश्मीर का ये 5 अहम विशेषाधिकार, अब राज्य में लागू होगा भारतीय संविधान

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नई दिल्ली: केसर की वादियों से महकते जम्मू कश्मीर में अब बहुत कुछ बदल जाएगा. चीड़ और बर्फ से अल्हादित वसुंधरा पर अब दो के बजाए एक झंडा लहराएगा. धरती का सवर्ग कहे जाने वाले इस भू भाग में अब एक ही प्रधान होगा. डल झील में तैरती मछलियों और नाव पर अब एक ही निशान नजर आएगा. यानी अब जम्मू कश्मीर में ‘एक विधान, एक प्रधान, एक निशान’ लागू होगा.

संकल्प पत्र जारी होने के बाद कई और भी चीजों में बदलाव देखने को मिलेगा. राज्य से अनुच्छेद 370 खत्म होते ही कई विशेषाधिकार खत्म हो जाएंगे. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर कौन-कौन से विशेषाधिकार हैं जो अब छिन जाएंगे.

1. दोहरी नागरिकता

जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को दोहरी नागरिकता मिली हुई है जो कि अब खत्म हो जाएगी. यानि जम्मू-कश्मीर के लोग जम्मू-कश्मीर के नागरिक हैं और इसके साथ ही वो भारत के भी नागरिक हैं. यानि वो देश के किसी दूसरे राज्य में भी बस सकते हैं, जमीन खरीद सकते हैं. जबकि दूसरे राज्य के लोग भारत के नागरिक हैं, लेकिन वो जम्मू-कश्मीर के नागरिक नहीं हो सकते. वो जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते और यहां के स्थाई नागरिक नहीं बन सकते.

2. झंडा और संविधान अलग

जम्मू-कश्मीर का अपना झंडा और अपना संविधान है. देश के किसी दूसरे राज्य के पास न अपना झंडा नहीं है और न ही अपना संविधान है. जम्मू-कश्मीर ने 17 नवंबर 1956 को अपना संविधान पारित किया था. संकल्प पत्र पारित हो जाने के बाद अब यह अधिकार भी छिन जाएगा. यहां अब भारतीय संविधान लागू होगा.

3. छिन गया पूर्ण राज्य का दर्जा

जम्मू कश्मीर से अब पूर्ण राज्य का दर्जा छिन गया है. केंद्र ने जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट कर केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया है. एक हिस्सा जम्मू कश्मीर तो दूसरा हिस्सा लद्दाख कर दिया गया है. दोनों हिस्सों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया है. एलान के मुताबिक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे जबकि लद्दाख में विधानसभा चुनाव नहीं होगा.

4. इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती

कश्मीर को जो विशेषाधिकार मिले हैं उसके तहत वहां आर्थिक इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती. अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद अब वहां भारतीय संविधान लागू होगा.

5. विधानसभा का कार्यकाल

देश में अब सभी विधानसभाओं का कार्यकाल पांच साल का हो जाएगा. पहले जम्मू कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता था.

6. वोटिंग का अधिकार 

जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार पहले सिर्फ वहां के स्थाई नागरिकों को था. किसी दूसरे राज्य के लोग यहां वोट नहीं दे सकते हैं. चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते हैं. अब यह अधिकार सभी को मिल जाएगा. मतलब साफ है कि कोई भी व्यक्ति वहां से चुनाव लड़ सकता है.

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