अयोध्या / सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: निर्मोही अखाड़े ने कहा- मस्जिद में 1959 में अंतिम बार नमाज पढ़ी गई

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नई दिल्ली . अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार से सुनवाई शुरू हो गई। यह सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की शुरुआत में ही साफ कर दिया कि इसकी न तो इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा और न ही रिकॉर्डिंग दिखाई जाएगी। संघ विचारक केएन गोविंदाचार्य ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में नियमित सुनवाई की रिकॉर्डिंग या सीधे प्रसारण के लिए सोमवार को शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा, ‘‘मुस्लिम पक्ष ने स्वीकार किया है कि मस्जिद में 16 दिसंबर 1959 को अंतिम बार नमाज पढ़ी गई थी। 1934 तक मस्जिद में नियमित रूप से नमाज पढ़ी जाती थी लेकिन बाद में शुक्रवार की नमाज भी बंद हो गई।’’

मार्च में बनाया था मध्यस्थता पैनल

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।

याचिकाकर्ता ने की थी रोज सुनवाई की अपील
इससे पहले याचिकाकर्ता ने कहा था कि मध्यस्थता पैनल से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा, इसलिए कोर्ट को जल्द फैसले के लिए रोज सुनवाई पर विचार करना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा था कि मध्यस्थता पैनल की स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद ही तय करेंगे कि अयोध्या मामले की सुनवाई रोजाना की जाए या नहीं। अयोध्या विवाद में पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की याचिका और जल्द सुनवाई का निर्मोही अखाड़ा ने भी समर्थन किया था। अखाड़े ने कहा था कि मध्यस्थता प्रकिया सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है। इससे पहले अखाड़ा मध्यस्थता के पक्ष में था।

कोर्ट ने मार्च में मध्यस्थता पैनल बनाया था
सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता समिति बनाई थी। मई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.अब्दुल नजीर की बेंच ने मध्यस्थता समिति को इस मामले को सुलझाने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया था। बेंच ने सदस्यों को निर्देशित किया था कि 8 हफ्ते में मामले का हल निकालें। पूरी बातचीत कैमरे के सामने हो।

सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गईं
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था- अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।

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