अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीर में डटे हैं अजीत डोभाल, शोपियां में आम लोगों के साथ खाना खाया, बातचीत की

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हट चुका है और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है. सभी के मन में एक ही सवाल है कि अब जम्मू-कश्मीर के हालात कैसे हैं? सूबे में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती है और खामोशी  है. सड़कों पर आवाजाही न के बराबर है. इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जम्मू-कश्मीर में डेरा डाले हैं. डोभाल ने आज शोपियां में कुछ स्थानीय लोगों के साथ खाना खाया और उनसे बातचीत की.

डोभाल शोपियां में जम्मू-कश्मीर के पुलिसकर्मियों से भी मिले. इस दौरान जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह मौजूद थे. अजीत डोभाल ने अन्य सुरक्षाबलों के जवानों से भी मुलाकात की और फोटो खिंचवाई. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अजीत डोभाल सोमवार से ही घाटी में हैं और लगातार स्थिति का जायजा ले रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसलों में अजीत डोभाल ने बड़ी भूमिका निभाई है. लगातार उन्होंने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया. पिछले दिनों 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को घाटी में भेजा गया तो इससे ठीक एक दिन पहले डोभाल घाटी में ही थे. इसके कुछ दिनों बाद केंद्र सरकार ने राज्य को दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला किया और जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष दर्जे को हटा लिया.

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन है. राजभवन के एक प्रवक्ता ने बताया कि अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाए जाने और दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में राज्य के प्रस्तावित विभाजन के बाद, राज्यपाल ने कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की. प्रवक्ता ने बताया कि अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं काम कर रही हैं, लोग बाजारों में दैनिक जरूरत की चीजें खरीदते देखे जा रहे हैं.

प्रवक्ता के अनुसार राज्यपाल को सूचित किया गया कि कुल मिलाकर राज्य की स्थिति संतोषजनक है और कहीं से किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई है. राज्यपाल ने घाटी के जिलों के उपायुक्तों को अपने कर्मचारियों को अलग-अलग इलाकों का दौरा करने, लोगों की आवश्यकताओं का जायजा लेने और उनका तेजी से समाधान करने का निर्देश दिया.

उन्होंने आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी चिंता दोहराई और प्रशासन को लोगों की वास्तविक जरूरतों पर उचित ध्यान देने की सलाह दी. राज्यपाल ने यह भी कहा कि अगर कश्मीर में पर्यटकों और अन्य लोगों को किसी भी तरह की परेशानी महसूस होती है तो उन्हें नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए या क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए.

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