अयोध्या पर जल्द फैसला आने की उम्मीद बढ़ी, SC हफ्ते में 5 दिन करेगा सुनवाई

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नई दिल्ली: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही ऐतिहासिक सुनवाई में आज एक नया आयाम जुड़ा. कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले की सुनवाई सप्ताह में 5 दिन होगी. आमतौर पर इस तरह के पुराने और विस्तृत सुनवाई की ज़रूरत वाले मामले मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही सुने जाते हैं. लेकिन कोर्ट ने कहा है कि इस मामले को सोमवार और शुक्रवार को भी सुना जाएगा. इस तरह की लगातार सुनवाई से 491 साल पुराने अयोध्या विवाद पर अंतिम फैसला जल्द आने की उम्मीद बढ़ गई है.

मामले की सुनवाई कर रही 5 जजों की बेंच के अध्यक्ष चीफ जस्टिस रंजन गोगोई हैं. उन्हें इसी साल 17 नवंबर को रिटायर होना है. ऐसे में इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि उनके कार्यकाल में मामला निपट पाएगा या नहीं. ऐसा न होने की स्थिति में नए सिरे से सुनवाई शुरू करनी पड़ती. लेकिन हर हफ्ते 2 दिन की अतिरिक्त सुनवाई से अब ये तय हो गया है कि निश्चित रूप से इस समय सीमा के भीतर ही कोर्ट का फैसला आ जाएगा.

आज क्या हुआ

6 अगस्त से शुरू हुई सुनवाई के तीसरे दिन रामलला विराजमान के वकील के परासरन ने जिरह जारी रखी. उन्होंने कोर्ट को बताया, “इलाहाबाद हाई कोर्ट याचिका दायर करने में देरी के चलते निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड की अर्जी को खारिज कर चुका है. आदेश सिर्फ पूजा का अधिकार मांगने वाली गोपाल सिंह विशारद की याचिका पर आया था.”

इस पर कोर्ट ने सवाल किया, “आपने मुकदमा भगवान की तरफ से दायर किया है. कानूनन मंदिर में स्थापित देवता को नाबालिग माना जाता है. उनके नाम से मुकदमा किया जा सकता है. लेकिन क्या जन्मस्थान को भी यही दर्जा दे सकते हैं?”
परासरन का जवाब था, “जिस किसी चीज को लोग पूजते हैं, उसे न्यायिक व्यक्ति का दर्जा दिया जा सकता है. जैसे सूरज की पूजा होती है, ज़रूरत पड़ने पर उसे भी कोर्ट को व्यक्ति की तरह देखना होगा. इस पर आंशिक सहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा, “उत्तराखंड हाई कोर्ट पहले गंगा नदी को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने वाला आदेश दे चुका है.

बुधवार को हुई सुनवाई में विवादित स्थान पर अधिकार जता रहा निर्मोही अखाड़ा मंदिर पर अपने ऐतिहासिक कब्ज़े के पक्ष में कोई सबूत नहीं दे पाया था. आज उसके वकील ने किन्हीं 2 पुरानी चिट्ठियों की मौजूदगी का दावा किया. कोर्ट ने उनसे कल चिट्ठियां पेश करने के लिए कहा है.

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