मोदी सरकार-2 के 75 दिन पूरे: पीएम बोले- जो फैसले कभी नामुमकिन थे, उन्हें हमने हकीकत में बदले

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नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के 75 दिन पूरे होने पर अपनी आगे की प्राथमिकताओं का जिक्र किया और जम्मू और कश्मीर, मेडिकल सुधार, शिक्षा के महत्व के साथ-साथ नौकरशाही के अंदर से भ्रष्टाचार के ट्यूमर को निकालने जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर बात रखी. न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने देश के सामने मौजूद सर्वाधिक विवादित मुद्दों और इन समस्याओं के निदान पर अपने विचार रखे.

सवाल आपने अपनी सरकार के 75 दिन पूरे किए हैं. हर सरकार इस तरह के मील के पत्थरों के नंबरों से गुजरती है और अपने द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बातें करती है. हम यह क्यों मानें कि आपकी सरकार अलग तरह की है?

जवाब हमने अपनी सरकार के शुरुआती कुछ दिनों में ही अभूतपूर्व रफ्तार तय कर दी. हमने जो हासिल किया वह स्पष्ट नीति, सही दिशा का परिणाम है. हमारी सरकार के पहले 75 दिनों में ही बहुत कुछ हुआ. बच्चों की सुरक्षा से लेकर चंद्रयान 2, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से लेकर तीन तलाक जैसी बुराई से मुस्लिम महिलाओं को मुक्त करना, कश्मीर से लेकर किसान तक, हमने दिखाया है कि मजबूत जनादेश प्राप्त दृढ़संकल्पित सरकार क्या हासिल कर सकती है. हमने जल आपूर्ति सुधारने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के एकीकृत दृष्टिकोण और एक मिशन मोड के लिए जलशक्ति मंत्रालय के गठन के साथ हमारे समय के सर्वाधिक जरूरी मुद्दे को सुलझाने के साथ शुरुआत की है.

सवाल क्या अभूतपूर्व जनादेश ने आपकी लोगों के प्रति इस प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है कि सुधारों को जमीनी स्तर तक ले जाना है? और, आपने अपने राजनैतिक वजन का इस्तेमाल कार्यपालिका से परे जाकर किया और जनादेश का इस्तेमाल विधायिका में किया?

जवाब- एक तरह से, सरकार की जिस तरह जोरदार तरीके से सत्ता में वापसी हुई है, उसका भी यह परिणाम है. हमने इन 75 दिनों में जो हासिल किया है, वह उस मजबूत बुनियाद का परिणाम भी है, जिसे हमने पिछले पांच सालों के कार्यकाल में बनाया था. पिछले पांच सालों में किए गए सैकड़ों सुधारों ने यह तय किया है कि देश आज उड़ान भरने के लिए तैयार है, इसमें जनता की आकांक्षाएं जुड़ी हुई हैं. 17वीं लोकसभा के प्रथम सत्र ने रिकॉर्ड बनाया है.

यह 1952 से लेकर अबतक का सबसे फलदायी सत्र रहा है. मेरी नजर में यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है, बल्कि बेहतरी का एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिसने संसद को जनता की जरूरतों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया है. कई ऐतिहासिक पहल शुरू की गईं, जिसमें किसानों और व्यापारियों के लिए पेंशन योजना, मेडिकल सेक्टर का रिफॉर्म, दिवाला और दिवालियापन संहिता में महत्वपूर्ण संशोधन, श्रम सुधार की शुरुआत..और यह और भी है. मुद्दे का सार यह है कि अगर नीयत सही हो, उद्देश्य और कार्यान्वयन स्पष्ट हो और लोगों का सहयोग हो तो फिर कोई सीमा नहीं है कि हम क्या कुछ कर सकते हैं.”

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