G-7 का सदस्य नहीं है भारत, फिर भी इस बड़े मंच पर PM मोदी को मिला न्यौता, जानिए इसकी खास वजह

0
177

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को फ्रांस पहुंचे. यहां वह विश्व के अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे. यहां पीएम मोदी की मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी होगी. इस दौरान दोनों के बीच कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. बता दें कि पीएम मोदी तीन देशों फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन की यात्रा करने के बाद मनामा से यहां पहुंचे हैं.

यहां यह जान लेना महत्वपूर्ण है की भारत G-7 देशों के समूह का हिस्सा नहीं है. अब आपके मन में यह सवाल आया होगा कि अगर भारत G-7 समूह का हिस्सा नहीं है तो पीएम मोदी को इस समूह की बैठक में हिस्सा लेने के लिए क्यों आमंत्रित किया गया है. आइए जानते हैं इसकी वजह

क्यों पीएम मोदी को मिला आमंत्रण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बार इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए विशेष आमंत्रण मिला है. दरअसल इस बैठक में G-7 सदस्य देशों के अलावा उन देशों को भी न्यौता दिया गया है जो राजनीति में मजबूत स्थान रखते हैं. भारत इस लिस्ट में नंबर एक पर है. इस शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और स्पेन को भी बुलाया गया है. वहीं अफ्रीकी देशों की बात करे तो रवांडा और सेनेगल इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे.

दुनिया भर में भारत का डंका बज रहा है. विदेश मंत्रालय की तरफ से भारत को G-7 की बैठक में शामिल होने के लिए मिलने वाले आमंत्रण पर कहा गया है कि जी-7 में भारत को न्यौता बड़ी आर्थिक शक्ति और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ निजी संबंध का सबूत है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी जलवायु, वातावरण समुद्री सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर सेशन को संबोधित करेंगे.

इसके अलावा भारत को आमंत्रण मिलने की एक और वजह यहा भी कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोष से भारत का स्थान काफी अहम है. इसके साथ ही फ्रांस के साथ भारत के बेहतर संबंध, इन्हीं वजहों से भारत को इस बार एलीट क्लब के सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है.

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच सकती है कश्मीर पर चर्चा

जी-7 सम्मेलन से इतर सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखाना होगा कि क्या डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच कश्मीर के मुद्दे पर कोई बात हो सकती है. दरअसल अमेरिका कश्मीर के मुद्दे पर भारत से बात करने का बहुत प्रयास कर रहा है. लेकिन भारत ने इसे द्विपक्षीय मुद्दा बता कर किसी तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी से साफ तौर पर मना कर दिया है. अब ऐसे में देखना होगा कि आज पीएम मोदी से ट्रंप कश्मीर पर बात करते हैं कि नहीं. जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर में स्थिति, व्यापार मुद्दों और परस्पर हितों के आपसी विषयों पर चर्चा करने की संभावना है.

जानिए G-7 के बारे में सबकुछ

जी-7 के सदस्य कौन है

बता दें कि जी-7 के सदस्य है, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, इटली और अमेरिका. जी-7 दुनिया के सात विकसित देशों का एलीट क्लब है. जो विश्व की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करती है. इन देशों का दुनिया की 40 प्रतिशत जीडीपी पर कब्जा है.

क्यों पड़ी G-7 समूह की जरूरत

70 के दशक में कई देशों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. पहला- तेल संकट और दूसरा- फिक्स्ड करेंसी एक्सचेंज रेट्स के सिस्टम का ब्रेक डाउन. 1975 में जी6 की पहली बैठक आयोजित की गई, जहां इन आर्थिक समस्याओं के संभावित समाधानों पर विचार किया गया. सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीति पर समझौता किया और वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए समाधान निकाले.

चीन नहीं है इसका हिस्सा

चीन G20 का हिस्सा है, लेकिन G7 में शामिल नहीं है. चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी जी7 का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह ये है कि चीन में सबसे ज्यादा आबादी है और प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी7 देशों के मुकाबले बहुत कम है. ऐसे में चीन को उन्नत या विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माना जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.