प्रधानमंत्री तेल सौदों के लिए रियाद में रुक सकते हैं

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नई दिल्ली, सऊदी तेल कंपनी के साथ दो सौदों को जल्दी ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सौदे को अंतिम रूप देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा से लौटते वक्त रियाद में कुछ समय के लिए ठहर सकते हैं। तेल कंपनी अरामको अगले महीने अपने आईपीओ की घोषणा कर सकती है। इस खबर के बीच भारत महाराष्ट्र में 44 अरब डॉलर के वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी परियोजना में तेजी लाने की कोशिश में जुटा हुआ है। इस परियोजना में सऊदी अरामको के पास पर्याप्त हिस्सेदारी है। इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का 15 अरब डॉलर का सौदा सऊदी तेल कंपनी से होना है। रिलायंस अपने प्रमुख रासायनिक व रिफाइनिंग व्यवसाय का 20 फीसदी हिस्सा बेचेगी।

14 सितंबर को अब्कैक तेल रिफाइनरी व खुरैस तेल क्षेत्र पर हुए ड्रोन हमले के बावजूद रियाद ने भारत को भरोसा दिया है कि तेल आपूर्ति में कोई बाधा नहीं होगी। इस हमले से सऊदी अरब के कुल उत्पादन पर आधे व वैश्विक तेल आपूर्ति पर 5 फीसदी पर असर पड़ा है।

वैश्विक प्रमुख कंपनी सऊदी आरामको व अबुधाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडनोक) ने भारतीय सरकारी तेल विपणन कंपनियों-इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) व हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) व हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल)- के साथ रत्नागिरि रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल (आरआरपीसीएल) में 50 फीसदी की हिस्सेदारी के लिए एक संयुक्त उपक्रम बनाया है। आरआरपीसीएल को वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है।

हालांकि, भूमि अधिग्रहण के मुद्दे ने परियोजना की प्रगति रोक दी है, जिसके जल्द हल होने की संभावना है।

अगस्त में रिलायंस ने अपने रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल्स व्यापार में से 15 अरब डॉलर के लिए अपनी 20 फीसदी शेयर बेचने की घोषणा की थी। रिलायंस ऐसा अपने बड़े कर्ज को कम करने के हिस्से के तौर पर कर रही है।

इन यह सौदा भारत-सऊदी संबंधों को काफी बढ़ाएगा।

सऊदी अरब, भारत को कच्चे तेल व तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वित्तवर्ष 2017-18 में भारत ने सऊदी अरब से 3.6 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था।

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