हरियाणा: 42 साल बाद कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे बीरेंद्र सिंह

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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019: 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के साथ अपना 42 साल लंबा सफर खत्म कर दिया था. समाज सुधारक छोटू राम के पोते बीरेंद्र सिंह के बेटे ने हिसार से 2019 का लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की है. बीरेंद्र सिंह का कद इतना बड़ा है कि परिवार के दो सदस्यों को टिकट नहीं बीजेपी की नीति इनके लिए लागू नहीं होती. बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेम लता उचाना से विधायक हैं और विधानसभा चुनाव में भी उन्हें टिकट मिलना तय माना जा रहा है.

42 साल कांग्रेस में रहे

बीरेंद्र सिंह का जन्म साल 1946 में हुआ था. बीरेंद्र सिंह समाज सुधारक छोटू राम के पोते हैं. बीरेंद्र सिंह के पिता नेकी राम दो बार राज्यसभा सदस्य रहे. वैसे तो बीरेंद्र सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही राजनीति में कदम रख लिया था. लेकिन बीरेंद्र सिंह ने अपना पहला चुनाव 1977 में उचाना से लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद बीरेंद्र सिंह 1982 में भी विधायक चुने गए. 1984 में बीरेंद्र सिंह पहली बार हिसार से लोकसभा में पहुंचे.

1994 में बीरेंद्र सिंह एक बार फिर उचाना से विधायक चुने गए. 1996 और 2005 में भी बीरेंद्र सिंह को उचाना सीट से विधानसभा चुनाव में जीत मिली. 2005 में बीरेंद्र सिंह हरियाणा के सीएम बनने की रेस में भी शामिल थे, लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनसे आगे निकल गए. बीरेंद्र सिंह को हुड्डा सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला.

बीरेंद्र सिंह के लिए कांग्रेस में बुरे वक्त की शुरुआत 2009 विधानसभा चुनाव में हार से हुई. 2009 में बीरेंद्र सिंह को उचाना सीट पर इनेलो मुखिया ओम प्रकाश चौटाला ने करीब 500 वोट से हराया था. इसके बाद 2010 में बीरेंद्र सिंह पहली बार राज्यसभा सदस्य चुने गए. लेकिन यूपीए 2 में बीरेंद्र सिंह को कोई मंत्रालय नहीं दिया गया.

चार साल तक कांग्रेस में अनदेखी के बाद 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीरेंद्र सिंह ने बीजेपी का दामन थाम लिया. मोदी सरकार में बीरेंद्र सिंह को ग्रामीण विकास मंत्रालय जैसा अहम पद मिला. 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बीरेंद्र सिंह की पत्नी को उचाना से उम्मीदवार बनाया गया. प्रेम लता इनेलो उम्मीदवार दुष्यंत चौटाला को करीब 7 हजार वोट से हराकर विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहीं.

बेटे की हुई राजनीति में एंट्री

2014 में बीरेंद्र सिंह अपने बेटे वीजेंद्र को कांग्रेस का टिकट नहीं दिला पाए थे. इसी नाराजगी की वजह से बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के साथ अपना 42 साल पुराना नाता तोड़ा. 2019 में वीजेंद्र सिंह को बीजेपी का टिकट दिलाने के लिए बीरेंद्र सिंह ने ना सिर्फ केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया, बल्कि राज्यसभा से भी इस्तीफा देने की पेशकश की थी. बीजेपी ने बीरेंद्र सिंह का इस्तीफा स्वीकार किए बिना ही वीजेंद्र को हिसार से लोकसभा का टिकट दिया. वीजेंद्र सिंह ने 2019 के लोकसभा चुनाव में हिसार से करीब 3 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है. हालांकि बीरेंद्र सिंह को मोदी 2 सरकार में मंत्री पद नहीं दिया गया है.

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