महात्मा गांधी के आदमकद होलोग्राम ने पेरिस में अहिंसा व्याख्यान में हिस्सा लिया

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पेरिस, यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (एमजीआईईपी) द्वारा भारत के स्थाई प्रतिनिधि के सहयोग से यहां आयोजित चौथे अहिंसा व्याख्यान में महात्मा गांधी के एक आदमकद होलोग्राम ने पैनलिस्टों के साथ संवाद किया। यह संवाद, शिक्षा के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की ओर प्रगति पर केंद्रित था।

इसकी शुरुआत फ्रांस में भारत के राजदूत और यूनेस्को में भारत के स्थाई प्रतिनिधि विनय मोहन क्वात्रा तथा यूनेस्को में प्रिऑरिटी अफ्रीका एंड एक्सटरनल रिलेशंस के सहायक महानिदेशक फिरमिन एडुआर्ड माटोको ने की।

एमजीआीईपी ने एक बयान में कहा कि पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित अहिंसा संवाद दो अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के मौके पर आयोजित किया गया। इस वर्ष महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई जा रही है।

गांधी के होलोग्राम ने सीएनआरएस के डेवलेपमेंटल साइकोलॉजी एंड कोग्निटिव न्यूरोसाइंस ऑफ एजुकेशन के प्रोफेसर ग्रेगोइर बोर्स्ट और यूनेस्को एमजीआईईपी के टैक 2019 के एडवाइजरी बोर्ड की सदस्य वेरा अल खोऊरी लाकोएयूल्हे के साथ चर्चा की। मानवीय विकास के लिए शिक्षा पर गांधी के दर्शन की महत्ता पर चर्चा के दौरान यूनेस्को एमजीआईईपी के निदेशक अनंत दुराइअप्पा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में युवाओं, शिक्षकों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और यूनेस्को के विभिन्न सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारतीय राजदूत क्वात्रा ने दुनिया में शांति की संस्कृति का निर्माण करने के लिए शिक्षा के गांधीवादी मूल्यों को बढ़ावा देने की महत्ता पर जोर देने वाली चर्चा की शुरुआत की।

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