नाथूलाः डोकलाम तक पहुंचने में सेना को लगेंगे सिर्फ 40 मिनट, भारत ने तैयार की सामरिक सड़क

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नाथूला: डोकलाम में चीन फिर से कोई नई चाल ना चल दे इसके लिए भारत ने सामरिक तौर से महत्वपूर्ण तीन नई सड़कें बना ली हैं. अब भारतीय सैनिकों को डोकलाम पहुंचने में महज 40 मिनट लगते हैं. जबकि पहले डोकलाम पहुंचने में 4-5 घंटे लगते थे वो भी पैदल या फिर खच्चर पर. साथ ही एबीपी न्यूज को जानकारी मिली है कि डोकलाम में हर रोज भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स सुबह एक साथ चाय पीते हैं ताकि डोकलाम में शांति बनी रहे.

सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए बॉर्डर पर्सनैल मीटिंग यानि बीपीएम मीटिंग की कवरेज के दौरान न्यूज को डोकलाम में भारत की सैन्य तौर से मजबूत स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी हाथ लगी है. डोकलाम में फिर से चीन अपनी कोई नई चाल चल दे इसके लिए भारतीय सेना ने बीआरओ यानि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाईजेशन के साथ मिलकर तीन नई सड़कों का काम शुरू किया है.

एक रोड पूरी तरह से तैयार है
सिक्किम में बीआरओ के कमांडर अशोक गुप्ता ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत में बताया कि इनमें से एक रोड‌ पूरी तरह से तैयार है. ये सड़क सिक्किम की राजधानी गंगटोक से नाथूला बॉर्डर तक जाने वाले हाईवे के करीब बाबा हरभजन मंदिर से सटे कूपूप (Kuppup) से सीधे डोकला पास (दर्रे) तक जाती है. डोकलाम विवाद से पहले ये एक कच्चा ट्रैक था और सैनिक कूपूप से डोकलाम पहुंचने के लिए पैदल या फिर खच्चर का सहारा लेते थे. यहां से डोकाला पास पहुंचने में चार से पांच घंटे लगते थे. लेकिन अब यहां पक्की सड़क बन गई है जो भीमबेस से होकर गुजरती है और गाड़ी से मात्र 40 मिनट में सैनिक डोकलाम प्लैटियू तक पहुंच सकते हैं. कोलतार से बनी इस सड़क पर टैंक भी दौड़ सकते हैं.

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