राष्ट्रीय राजधानी में अपराध में वृद्धि

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नई दिल्ली, दिल्ली में औसतन दुष्कर्म के पांच मामले प्रतिदिन दर्ज किए जाने के अलावा यहां हत्या की घटनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे केंद्र सरकार काफी चिंतित है। क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी उसी की है।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 15 सितंबर तक दिल्ली में कुल 2,12,763 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल इस दौरान 1,67,480 थे।

आंकड़ों के अनुसार, इस साल इस दौरान गैर जघन्य अपराधों के 2,08,925 मामले दर्ज किए गए, वहीं पिछले साल यह आंकड़ा 1,63,388 था।

अपराध के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि दिल्ली में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर तक दुष्कर्म के 1,609 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं पिछले साल इस दौरान दुष्कर्म के 1,557 मामले दर्ज हुए थे।

आईएएनएस को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर तक हत्या के 373 मामले दर्ज किए गए, वहीं पिछले साल यह आंकड़ा 338 था।

राष्ट्रीय राजधानी में आतंकवाद और अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजधानी को सुरक्षित बनाने के लिए हाल ही में दिल्ली पुलिस को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए थे।

अमित शाह ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को अपराध, तस्करी और आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों को गंभीरता से लेने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

विधानसभा चुनाव से पहले अपराध के आंकड़ों में वृद्धि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह चुनाव में उसके खिलाफ मुद्दा बन सकता है।

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) चुनाव में भाजपा की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए इस मुद्दे को उठा सकती है। विशेषकर इस मुद्दे को वह पहले से उठाती रही है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार से हटाकर दिल्ली सरकार को दी जानी चाहिए।

आप 2015 में महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को उठाकर दिल्ली की सत्ता में आई थी। उसने स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर दिल्ली का वादा किया था। पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में मुख्य विषय जल, बिजली दरों में कमी का था।

दिल्ली में विधानसभा चुनाव देखते हुए गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस प्रमुख को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों को तरजीह देने और अन्य अपराधों के साथ-साथ प्रमुख अपराधों में जांच शीघ्र करने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर तक हत्या के प्रयास के 342 मामले, लूट के 1,487 मामले, डकैती के 12 मामले और फिरौती के लिए अपहरण के 11 मामले दर्ज किए गए थे।

इस साल इस दौरान जघन्य अपराध के 3,838 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल इस दौरान दर्ज जघन्य अपराध के 4,092 मामलों से अपेक्षाकृत कम हैं।

लेकिन, जघन्य और गैर जघन्य अपराधों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है। इनमें छपटमारी के 4,516, चोट पहुंचाने के 972, सेंधमारी के 2,216, मोटर वाहन चोरी के 33,263, घरों में चोरी के 1,948, अन्य सामानों की चोरी के 1,33,246, महिला उत्पीड़न के 2,116, अपहरण या भगा ले जाने के 4,392, घातक दुर्घटनाओं के 991 और सामान्य दुर्घटनाओं के 3,048 मामले दर्ज हुए।

अगर पिछले सालों से तुलना की जाए तो 2018 में 2,50,719 अपराधिक मामले, साल 2017 में 2,33,580 मामले और साल 2016 में 2,09,519 मामले दर्ज किए गए।

आंकड़ों पर गौर करें तो अपराध में प्रतिवर्ष बढ़ोत्तरी स्पष्ट दिख रही है।

दिल्ली में 2014 में 1,55,654 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जो 2015 में बढ़कर 1,91,377 हो गए। इसी वर्ष केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार आई थी।

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