HC के आदेश के बाद आरे के पेड़ों की कटाई शुरू, दीया मिर्ज़ा, विशाल ददलानी समेत कई हस्तियों ने किया विरोध

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नई दिल्ली: मुंबई का फेफड़ा कहे जाने वाले आरे कॉलोनी के जंगल को बंबई हाईकोर्ट ने जंगल मानने से इनकार कर दिया और सरकार को मेट्रो कार शेड के लिए वहां करीब 2700 पेड़ काटने की इजाज़त दे दी. कोर्ट के आदेश के बाद कल रात आरे के पेड़ों को काटने का काम शुरू कर दिया गया. इन पेड़ों को बचाने लिए लंबे समय से आम लोगों के साथ-साथ कई फिल्मी सितारे भी संघर्ष कर रहे थे. लेकिन अदालत ने पेड़ बचाने वालों की याचिका को खारिज कर दिया.

अब सरकार के इस कदम की सिनेमा के कई सितारों ने आलोचना की है. दीया मिर्ज़ा, विशाल ददलानी. स्वरा भास्कर और अशोक पंडित जैसी हस्तियों ने ट्वीट के ज़रिए पेड़ काटे जाने का विरोध किया है.

दीया मिर्ज़ा ने ट्विटर पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और बीएमसी को टैग करते हुए एक वीडियो शेयर किया और लिखा, “क्या ये गैरकानूनी नहीं है? ये अभी आरे में हो रहा है. क्यौं ? कैसे?”

अपने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए दीया मिर्ज़ा ने लिखा, ” ऐसा माना जाता है कि मंज़ूरी मिलने और आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिस अपलोड होने के बाद 15 दिन का इंतज़ार किया जाता है. लेकिन यहां कोई इंतज़ार नहीं किया गया. हमारे पेडों को काटा जा रहा है जबकि नागरिक इसे रोकने के लिए बेताब हैं.”

दीया मिर्ज़ा के अलावा विशाल ददलानी ने भी पेड़ काटे जाने का खुलकर विरोध किया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “आधी रात में इस वक्त आरे के जंगल की हत्या की जा रही है. नरेंद्र मोदी, देवेंद्र फडणवीस कृपया ऐसा न करें. कृपया करके एक कॉल करके इसे रुकवाएं, कम से कम तब के लिए जब तक एससी (सुप्रीम कोर्ट) के पास इस याचिका रिव्यू करने का मौका है. कृपया दिखाइए कि आप हमारी फिक्र करते हैं, हमारे सेहत की फिक्र करते हैं, हमारी हवा की फिक्र करते हैं, हमारे आने वाले कल की फिक्र करते हैं.”

विरोध करने वालों में अशोक पंडित भी शामिल हैं. उन्होंने आरे के पेड़ काटे जाने को नरसंहार करार दिया है. उन्होंने ये भी कहा है कि मुंबई को इसकी कीमत अदा करनी होगी और हम इसे झेलेंगे.

क्या है पूरा मामला

दरअसल मुंबई के आरे क्षेत्र में एक मेट्रो कार शेड बनना है. इस मेट्रो कार शेड को बनाने में लगभग 2700 पेड़ काटे जाने है. इसी बात का पर्यावरणविद और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.




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