झारखंड : साइकिल के जरिए ‘बदलाव अभियान’ चला रही झामुमो

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रांची, झारखंड में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर करीब-करीब सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को सरजमीं पर उतारने में लगे हुए हैं। इसी क्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तर्ज पर हर घर तक पहुंचने के लिए कार्यकर्ताओं को साइकिल थमा दिया है। झामुमो के कार्यकर्ता ‘बदलाव अभियान’ (परिवर्तन) के तहत गांव-गांव, घर-घर जाकर सरकार की नाकामियों के बारे में जन-जन को बता रहे हैं। 

इस अभियान की साइकिल भी खास तरह से डिजाइन की गई है। ‘बदलाव’ की साइकिल ‘ऑडियो सिस्टम’ से लैस है, जिसके जरिए झामुमो के संदेशों को जनता के बीच प्रचारित किया जा रहा है। 

झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आईएएनएस को बताया कि पहली बार साइकिल को प्रचार अभियान में लगाया गया है। उन्होंने भाजपा से पहले झामुमो द्वारा साइकिल से प्रचार अभियान करने का दावा करते हुए कहा कि भाजपा ने झामुमो से साइकिल से प्रचार करना सीखा है। उन्होंने कहा कि साइकिल को प्रचार की सवारी बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि ‘बदलाव’ के रूप में पार्टी कार्यकर्ता पार्टी के वादों-इरादों और नारों के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की विफलताओं को लेकर गांव-गांव पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक विधनसभा में प्रखंडवार कार्यकर्ताओं को साइकिल दी गई है। 

उन्होंने कहा कि कुछ साइकिलें भाड़े पर ली गई हैं, जबकि कई साइकिलें खुद कार्यकर्ताओं की हैं। साइकिल के करियर के स्थान पर डिजाइन कर एक पोस्टर बनवाया गया है, जिसमें लोगों से ‘बदलाव’ करने का निवेदन किया जा रहा है। पोस्टर में पार्टी के अध्यक्ष शिबू सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरें हैं। 

इस दौरान कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचकर लोगों के बीच पोस्टर और पर्चे भी बांट रहे हैं, जिससे पार्टी की नीतियों और सिद्घांतों को उनतक पहुंचाया जा सके। 

झामुमो के नेता मिथिलेश ठाकुर आईएएनएस से कहते हैं कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में पांच-पांच कार्यकर्ता साइकिल से गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचकर पार्टी के संदेशों को पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। यह सरकार अमीरों की तो सुनती है, परंतु गरीबों की नहीं सुनती है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि झामुमो की सरकार बनने के बाद जनता को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी। 

ठाकुर का दावा है कि कार्यकर्ता प्रतिदिन 20 से 25 किलोमीटर साइकिल चलाकर एक गांव से दूसरे गांव पहुंच रहे हैं। साइकिल पर ऑडिओ सिस्टम और माइक भी लगाया गया है। 

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