ग्लोबल हंगर इंडेक्स: भारत की रैंकिंग पर राहुल गांधी ने कहा- सबका साथ सबका विकास के खोखले दावों की पोल खुली

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नई दिल्ली: ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) में 117 देशों की रैंकिंग में भारत 102 पायदान पर है. ये रिपोर्ट भारत के लिए चिंता का विषय है. इस रिपोर्ट की मानें तो भारत की हालत एशिया के कई देशों से खराब है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स की लिस्ट में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश की स्थिति भारत से बेहतर है. पाकिस्तान इसमें 94वें और बांग्लादेश 88वें नंबर पर है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि इस रैंकिंग से सरकार की नीति में भारी विफलता का पता चलता है.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ”भारत की ग्लोबल हंगर इडेक्स की रैंकिंग 2014 से लगातार गिर रही है, अब यह 102/117 हो गई है. इस रैंकिंग से सरकार की नीतियिों की भारी विफलता का पता चलता है और पीएम मोदी के सबका साथ सबका विकास के खोखले दावों की पोल खोल दी है.”

भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाले जीएचआई की वेबसाइट में बुधवार को बताया गया कि बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत समेत 17 देश पांच से कम जीएचआई अंक के साथ टॉप पर रहे. आयरलैंड की एजेंसी ‘कन्सर्न वर्ल्डवाइड’ और जर्मनी के संगठन ‘वेल्ट हंगर हिल्फे’ की तरफ से संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट में भारत में भरपेट भोजन नहीं मिलने की वजह से उत्पन्न भूख के स्तर को ‘‘गंभीर’’ बताया गया है.

इस लिस्ट में भारत पिछले साल 119 देशों में 103वें स्थान और 2000 में 113 देशों में 83वें स्थान पर था. इस बार देश 117 देशों में 102वें स्थान पर रहा है. भारत के जीएचआई अंक में गिरावट आई .  भारत का जीएचआई अंक 2005 में 38.9, 2010 में 32 और 2010 से 2019 के बीच 32 से 30.3 अंक के बीच रहा.

जीएचआई अंक की चार संकेतकों के आधार पर गणना की जाती है-अल्पपोषण, बच्चों के कद के हिसाब से कम वजन होना, बच्चों का वजन के हिसाब से कद कम होना और बाल मृत्युदर. रिपोर्ट के अनुसार भारत में कद के हिसाब से कम वजन होने आंकड़ा 2008-2012 में 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 2014-18 में 20.8 प्रतिशत हो गया.

रिपोर्ट में कहा गया कि छह महीने से 23 महीने के सभी बच्चों में से केवल 9.6 प्रतिशत बच्चों को ‘‘न्यूनतम स्वीकार्य आहार’’ दिया गया. इसमें कहा गया है, ‘‘भारत में कद से हिसाब से बच्चों का वजन कम होने की दर अत्यधिक है जो 20.8 प्रतिशत है. यह दर इस रिपोर्ट में शामिल देशों में सबसे ज्यादा है.’’

रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष पीड़ित और जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से जूझ रहे यमन और जिबूती जैसे देशों ने भी इस मामले में भारत से अच्छा प्रदर्शन किया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि नेपाल (73), श्रीलंका (66), बांग्लादेश (88), म्यामां (69) और पाकिस्तान (94) जैसे भारत के पड़ोसी देश भी ‘गंभीर’ भूख की श्रेणी में है लेकिन उन्होंने भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है. इसमें चीन 25वें स्थान पर है और वहां भरपेट भोजन नहीं मिलने की वजह से उत्पन्न भूख का स्तर कम है जबकि श्रीलंका में इस समस्या का स्तर ‘मध्यम’ है.


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