भारत, पाकिस्तान के बीच करतारपुर करार, सेवा शुल्क विवाद कायम

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नई दिल्ली, भारत व पाकिस्तान ने गुरुवार को करतारपुर कॉरिडोर के लिए परिचालन संबंधी तौर-तरीकों के समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन पाकिस्तान द्वारा लगाया गया 20 डॉलर सेवा शुल्क का पेचीदा मुद्दा अनसुलझा रहा। इस समझौते से कॉरिडोर के अगले महीने सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव की 550वीं जयंती के पहले उद्घाटन का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ यह सीमा से 4.5 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवल जिले में स्थित पवित्र मंदिर तक श्रद्धालुओं की यात्रा को सक्षम बनाएगा।

हस्ताक्षर समारोह करतारपुर साहिब कॉरिडोर जीरो प्वाइंट, इंटरनेशनल बॉर्डर, डेरा बाबा नानक पर हुआ।

इस समझौते के हस्ताक्षर होने के साथ गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार किया गया है।

यह यात्रा वीजा मुक्त होगी और तीर्थयात्री व्यक्तिगत तौर पर या समूहों में यात्रा कर सकते हैं और पैदल भी जा सकते हैं।

इस समझौते के तहत भारत सरकार पाकिस्तानी अधिकारियों को तीर्थयात्रियों की सूची अग्रिम तौर पर 10 दिन पहले जारी करेगी और तीर्थयात्रियों को यात्रा के चार दिन पहले मेल के जरिए सूचित किया जाएगा।

तीर्थयात्रियों को सिर्फ एक वैध पासपोर्ट ले जाने की जरूरत है और भारतीय मूल के व्यक्तियों को अपने देश के पासपोर्ट के साथ ओवरसीज सिटिजनसिप ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड ले जाने की जरूरत होगी।

कॉरिडोर सुबह से लेकर शाम तक खुला रहेगा और सुबह तीर्थयात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन लौटना होगा। कॉरिडोर पूरे साल संचालित होगा, सिर्फ अधिसूचित दिनों को छोड़कर, जिसकी सूचना अग्रिम तौर पर दी जाएगी।

पाकिस्तान पक्ष ने भारत को ‘लंगर’ और ‘प्रसाद’ वितरण के पर्याप्त प्रावधान करने का भरोसा दिया है।

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