Assembly Elections Analysis: जानिए- कैसे बीजेपी महाराष्ट्र-हरियाणा में जीतकर भी ‘हार’ गई

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महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजे: आज देशभर की नज़रें महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों के नतीज़ों को पर टिकी हुई है. महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन 145 सीटों के आंकडे को पार कर सत्ता में वापसी करती नज़र आ रही है. वहीं हरियाणा में बीजेपी के लिए मुश्किल मुश्किलें नज़र आ रही है. आखिरी अपडेट मिलने तक बीजेपी 36 सीटों पर आगे दिख रही है जबकि कांग्रेस से उसे कड़ी टक्कर मिल रही है.

लेकिन 2014 से मोदी लहर के सहारे लगभग हर चुनाव में अपने प्रदर्शन का डंका बजवा रही बीजेपी के लिए महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में खतरे घंटी है, वहीं कांग्रेस के लिए एक बड़ी सीख भी छुपी है. बीजेपी के हरियाणा और महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद जो बुरी खबर आई है उस पर एबीपी न्यूज़ के राजनीतिक संपादक पंकज झा और चुनाव एक्सपर्ट अभय दूबे ने अपने विचार साझा किए हैं.
आइये जानें कैसे महाराष्ट्र जीतकर और हरियाणा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी BJP के लिए नहीं हैं शुभ संकेत:
‘370 के मुद्दे’ का फैसलों पर नहीं दिखा असर:

एबीपी न्यूज़ के एक्सपर्ट्स और नतीज़ों ने ये साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में कश्मीर से आर्टीकल 370 को हटाने का इन दोनों राज्यों के परिणामों पर कोई असर नहीं दिखा. चुनाव से पहले गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि इन चुनावों के नतीज़ों से ये साफ हो जाएगा कि देश ने आर्टिकल 370 के मुद्दे पर वोट दिया. लेकिन चुनाव के नतीज़ें बिल्कुल इससे उलट है.
एक्सपर्ट्स ने ये भी बताया कि राष्ट्रीय मुद्दों के चक्कर में आर्थिक संकट, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को अनदेखा नहीं कर सकते. एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा कि बीजेपी इन चुनावों के जरिए राष्ट्रीय राजनीति को ये संदेश देना चाह रही थी कि हम भारत के इतिहास में पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी बनने जा रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.
प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर या मुख्यमंत्रियों के नाम पर पड़े वोट:

एबीपी एक्सपर्ट्स ने साफ-साफ कहा कि बीजेपी ने अपने दो मुख्यमंत्रियों यानि देवेन्द्र फणडवीस और मनोहर लाल खट्टर के नाम पर वोट मांगे. मोदी ने स्टार प्रचारक के तौर पर प्रचार किया लेकिन मुख्य तौर पर वोट मुख्यमंत्रियों के नाम पर पड़े. दोनों के 5 साल के कार्यकाल में कई विवाद हुए. उन दोनों के नाम और काम पर बीजेपी ने वोट मांगे लेकिन उन्हें नतीजा अच्छा नहीं मिला.
सोनिया गांधी के फैसले से कांग्रेस ने की वापसी:

एबीपी न्यूज़ के एक्सपर्ट्स ने ये भी साफ किया कि जिस तरह से राहुल गांधी की बात को किनारे रखते हुए सोनिया गांधी ने भूपेंदर सिंह हुड्डा को प्रदेश का नेतृत्व सौंपा और उन्हें आगे कर चुनाव लड़ा. इस वजह से ही कांग्रेस को इतनी सीटें मिल सकी. साथ ही ये क्षेत्रिया दिग्गज़ नेताओं का वर्चस्व था जिसकी वजह से कांग्रेस को फायदा पहुंचा.
शरद पवार ने किया कमाल:

भले ही महाराष्ट्र में बीजेपी 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, लेकिन बीजेपी-शिवसेना गठबंधन से बाहर रहते हुए एनसीपी ने अपनी धाक जमाई है. शरद पवार के दम पर और उनके नेतृत्व में एनसीपी ने 55 सीटों पर बनाई हुई है. एबीपी के एक्सपर्ट्स ने बताया कि शरद पवार ने इस चुनाव में जमकर रैली की और बारिश में भीगते हुए अपनी पार्टी के लिए प्रचार किया.

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