प्रोफेसर गिलानी का होगा पोस्टमॉर्टम, घर और एम्स पर सुरक्षा इंतजाम कड़े किए गए

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नई दिल्ली, संसद भवन पर 13 दिसंबर सन 2001 में हुए हमले के आरोप में बरी किए जा चुके दिल्ली विश्वविद्यालय (जाकिर हुसैन कॉलेज) के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी का पोस्टमॉर्टम कराए जाने की तैयारियां चल रही हैं। 

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, “जानलेवा हमला होने के बाद से ही चूंकि प्रो. गिलानी पुलिस सुरक्षा घेरे में थे। ऐसे में उनकी मौत को लेकर बाद में कोई विवाद खड़ा न हो। इसीलिए दिल्ली पुलिस ने गिलानी के शव का पोस्टमॉर्टम कराना चाहा है।”

उल्लेखनीय है कि, प्रोफेसर गिलानी की मौत गुरुवार शाम को हो गई थी। घटना के वक्त प्रोफेसर गिलानी एक जिम में व्यायाम कर रहे थे। उसी वक्त उन्हें दर्द की शिकायत हुई। प्रोफेसर गिलानी को तत्काल दिल्ली के एक निजी अस्पताल में ले जाकर दाखिल कराया गया।

चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि प्रोफेसर गिलानी की मौत हो चुकी है।

दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने आईएएनएस को शुक्रवार को बताया, “प्राथमिक जांच में यही पता चला है कि प्रोफेसर गिलानी की मौत हृदयाघात के कारण हुई है. उन्हें चूंकि लंबे समय से पुलिस सुरक्षा घेरा मिला हुआ था। ऐसे में दिल्ली पुलिस भविष्य में गिलानी की मौत के मुद्दे पर कोई सिरदर्द मोल नहीं लेना चाहती है। इसी के चलते दिल्ली पुलिस ने गिलानी के शव का पोस्टमार्टम कराने की योजना बनाई है।”

सूत्रों के मुताबिक, “प्रोफेसर गिलानी की मौत की कानूनन सही वजह और वक्त का पता सिर्फ और सिर्फ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही पता चल सकेगा। लिहाजा शुक्रवार को दोपहर के वक्त प्रोफेसर गिलानी के शव का पोस्टमॉर्टम दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कराया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर एसएआर गिलानी दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में अरबी भाषा पढ़ाते थे। सन 2001 में वे तब चर्चा में आये जब दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की टीम (सहायक पुलिस आयुक्त राजवीर सिंह की टीम) ने उन्हें गिरफ्तार किया था।

प्रोफेसर गिलानी पर संसद हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। हांलांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर गिलानी को सभी आरोपों से बा-इज्जत बरी कर दिया था। संसद हमले के आरोपों में घिरे प्रोफेसर गिलानी ने कुछ समय बाद जाकिर हुसैन कॉलेज के अध्यापन कार्य से भी मुक्ति पा ली थी।

दूसरी बार प्रोफेसर गिलानी चर्चा में तब आए जब उनके ऊपर उनकी वकील नंदिता हक्सर के घर के बाहर अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली चलाई गई। उस हमले में प्रोफेसर गिलानी बाल-बाल बच गए थे। तभी से प्रोफेसर गिलानी पुलिस सुरक्षा में जीवन बिता रहे थे।

तीसरी बार गिलानी का नाम तब विवादों में आया जब दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में उन पर देश विरोधी नारेबाजी करने का आरोप लगा। श्रद्धांजलि सभा का आयोजन संसद पर हमले के मुख्य आरोपी (फांसी पर लटकाये जा चुके) अफजल गुरू की बरसी के मौके पर किया गया था।

प्रोफेसर गिलानी लंबे समय से दक्षिणी दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में परिवार के साथ रह रहे थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। चर्चा का बाजार इस बात को लेकर भी गरम है कि परिवार, प्रोफेसर गिलानी के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद कश्मीर घाटी (श्रीनगर) ले जाने की योजना बना रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि परिवार और दिल्ली पुलिस की ओर से अधिकृत रुप से अभी तक नहीं की गई है।

प्रोफेसर गिलानी की मौत की खबर सुनते ही अस्पताल और उनके घर पर मिलने वालों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। शुक्रवार सुबह से ही प्रोफेसर गिलानी के दिल्ली के जाकिर नगर स्थित घर पर और एम्स हॉस्पिटल (जहां शुक्रवार को प्रोफेसर गिलानी का पोस्टमॉर्टम होना है) भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। एहतियातन दोनो ही स्थानों पर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा भी बढ़ा दी है।

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