कश्मीर दौरे के बाद EU सांसदों ने कहा, ‘कश्मीर को अफगानिस्तान बनते नहीं देखना, विकास चाहते हैं यहां के लोग’

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए यूरोपीय यूनियन के सांसदों ने बड़ा बयान दिया है. सांसदों ने कहा है कि हम जम्मू-कश्मीर को दूसरा अफगानिस्तान बनते नहीं देखना चाहते. यहां के लोग शांति और विकास चाहते हैं. सांसदों ने कहा कि ये एक सामान्य दौरा था. हमने यहां आकर तथ्यों की पड़ताल की है. हमारा मकसद कश्मीर की जनता से मिलना था. इस दौरे को गलत प्रचारित किया गया है.

कल हुए आतंकी हमले की निंदा करते हैं- ईयू सांसद

ईयू सांसदों ने कहा, ‘’हम तथ्यों की पड़ताल करने के लिए अलग-अलग देश में जाते हैं. ये दौरा भारतीय सरकार की तरफ से आयोजित किया गया था. इस दौरे पर हमने बेहतर तरीके से वहां के हालातों का जायजा लिया.’’ उन्होंने कहा, ‘’कल रात यहां आतंकी हमले में पांच मासूम लोगों की हत्या कर दी गई. हम इसकी निंदा करते हैं.’’

ईयू सांसदों ने कहा, ‘’हमारे देश में भी आतंकवाद की समस्या है. आतंकवाद सिर्फ भारत की सम्स्या नहीं है, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की समस्या है. आतंकवाद किसी देश को तबाह नहीं कर सकता. आतंकी अपने लिए युद्ध छेड़ते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘’हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन करते हैं.’’

कश्मीरी विकास और शांति चाहते हैं- ईयू सांसद

ईयू सांसदों ने बताया, ‘’हमने कश्मीर जाकर आम लोगों और भारतीय सेना के जवानों ने बात की. हमने उनसे पूछा कि वह आतंक के खिलाफ कार्रवाई को किस तरह अंजाम देते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘’हम कश्मीर के युवाओं से भी मिले. कश्मीर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं. वहां के लोग विकास और शांति चाहते हैं. वह चाहते हैं कि उनके यहां अस्पताल और स्कूल खुलें और भारतीय की तरह उन्हें भी सभी अधिकार मिलें.’’

ईयू सांसदों ने आगे कहा, ‘’केंद्र सरकार कश्मीर के हालात सुधारने के लिए काफी उपाय कर रही है. कश्मीर में काफी भ्रष्टाचार है. केंद्र की तरफ से राज्य के विकास के लिए काफी पैसे भेजे जाते हैं, लेकिन वो पैसे जनता तक नहीं पहुंचते.’’ उन्होंने कहा, ‘’सरकार यहां समान्य जीवन लाने की कोशिश कर रही है.’’

हम नाज़ीवादी होते तो जनता हमें नहीं चुनती- ईयू सांसद

सांसदों ने कहा, ‘’कश्मीर के बारे में काफी कुछ कहा और लिखा जा रहा है. हमें भारतीय राजनीति से कोई मतलब नहीं है. हम यहां की राजनीति में दखल देने नहीं आए हैं. हम सिर्फ तथ्य डुटाने आए हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘’हम खुद देखना चाहते थे कि कश्मीर में किस तरह के बदलाव लाए जा रहे हैं. कुछ लोगों ने कहा कि हम नाज़ीवादी हैं. अगर ऐसा होता तो जनता हमें नहीं चुनती.’’


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