सऊदी अरब का दौरा खत्म कर लौटे पीएम मोदी, आतंकवाद की चुनौती से निपटने में सहयोग का किया वादा

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तड़के सऊदी अरब का दौरा खत्म कर नई दिल्ली लौटे. पीएम मोदी का खाड़ी देश का दौरा कई मायनों में खास रहा. मंगलवार को भारत और सऊदी अरब ने तेल-गैस, रक्षा, नागर विमानन समेत विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

बहुचर्चित वैश्विक वित्तीय सम्मेलन (एफआईआई) में शामिल होने के लिए खाड़ी साम्राज्य के दो दिन के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर करीब से काम करने को लेकर विचार साझा किए.

आतंकवाद पर पाकिस्तान को संदेश

दोनों नेताओं ने सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा की और द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग बनाने पर सहमति जताई. पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी माने जाने वाला सऊदी अरब क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त बनाने के भारत के अभियान में उसका पक्ष ले रहा है और इस चुनौती से निपटने के लिए पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है.

बाद में शाम में, प्रधानमंत्री मोदी ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ कई विषयों पर चर्चा की. ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव’ फोरम में शामिल होने दो दिन के दौरे पर सऊदी अरब पहुंचे मोदी ने सऊदी शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज और युवराज मोहम्मद बिन सलमान से व्यापक मुद्दों पर चर्चा की.

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आर्थिक संबंध सचिव टी एस त्रिमूर्ति ने कहा कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद की निंदा की और द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने कृषि, तेल एवं गैस, समुद्री सुरक्षा नवीन प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, व्यापार और निवेश पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की.

26 लाख भारतीयों के लिए बड़ा कदम

सऊदी अरब में रूपे कार्ड शुरू करने के संबंध में भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए. यहां 26 लाख भारतीय काम करते हैं. भारत से करीब दो लाख हाजी और तीन लाख उमराह तीर्थयात्री हर साल सऊदी अरब का दौरा करते हैं और रूपे कार्ड की स्वीकार्यता उन्हें सस्ते लेन-देन में मदद करेगी.

दोनों देशों ने महाराष्‍ट्र के रायगढ़ में महत्वाकांक्षी पश्चिमी तट रिफाइनरी परियोजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है. इसमें सऊदी तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अरामको, यूएई की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां निवेश करेंगी. इंडियन ऑयल मिडिल ईस्ट और सऊदी कंपनी अल जेरी के बीच संयुक्त उपक्रम के लिए भी एमओयू पर हस्ताक्षर हुए जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध बढ़ेंगे.

भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और वह अपनी तेल जरूरतों का 83 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इराक के बाद सऊदी अरब इसका दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. उसने वित्त वर्ष 2018-19 में भारत को 4.03 करोड़ टन कच्चा तेल बेचा जबकि भारत ने 20.73 करोड़ टन तेल का आयात किया था. भारत हर महीने सऊदी अरब से करीब 2,00,000 टन एलपीजी खरीदता है.

पीएम मोदी ने दिया न्योता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब सहित दुनिया के निवेशकों को भारत में निवेश का न्योता देते हुए कहा कि भारत अर्थव्यवस्था की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिये तेल एवं गैस क्षेत्र की ढांचागत सुविधाओं में 100 अरब डॉलर का निवेश करेगा. उन्होंने कहा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था के आकार को दोगुना कर 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की योजना को लेकर आगे बढ़ रहा है.

सऊदी अरब के सालाना निवेश मंच से मोदी ने निवेशकों के समक्ष स्थिर, भरोसेमंद और पारदर्शी नीति व्यवस्था का वादा किया. स्विट्जरलैंड के विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की तर्ज पर सऊदी अरब में ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव फोरम’ बैनर तले होने वाले इस वार्षिक सम्मेलन को ‘मरुभूमि में दावोस’ कहा जा रहा है.

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