पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकियों को फंडिंग, भर्ती और उनकी ट्रेनिंग रोकने में नाकाम

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वॉशिंगटन. अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2018’ जारी की। इसके मुताबिक, पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकियों को फंडिंग, भर्ती और उनकी ट्रेनिंग रोकने में नाकाम रहा है। रिपोर्ट में पाकिस्तान को अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगार भी बताया गया। यहां के राजनेताओं ने तालिबान को खुलेआम समर्थन दिया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आतंकी संगठनों ने बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में सरकारी, गैर-सरकारी संगठनों और डिप्लोमेटिक मिशनों को लगातार निशाना बनाया। आतंकी संगठन पाकिस्तान के अलावा पड़ोसी देशों में भी हमलों को भी अंजाम देते रहे हैं।

टेरर फंडिंग रोकने में पाकिस्तान नाकाम

जुलाई 2018 में जमात-उद-दावा सरगना और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने राजनीतिक पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) बनाकर चुनाव लड़ा था। इस पर रिपोर्ट में कहा गया कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दावा की फंडिंग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान सरकार इस पर लगाम लगाने में नाकाम रही।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को फरवरी 2020 तक समय दिया

टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे-लिस्ट में डाला था। उसे 27 सूत्रीय योजना को क्रियान्वित करने के लिए 15 महीने की डेडलाइन दी गई थी, जो सितंबर में खत्म हो गई। इसके बाद एफएटीएफ ने अक्टूबर में पाकिस्तान को चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया के समर्थन के बाद टेरर फंडिंग रोकने के लिए फरवरी 2020 तक का समय और दिया है।

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