मप्र में ‘काजू’ सुधारेगा किसानों की माली हालत

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भोपाल, मध्य प्रदेश में किसानों की माली हालत सुधारने की दिशा में चल रही कोशिशों में सरकार नवाचारों पर जोर दे रही है और उसी के तहत बंजर पड़ी भूमि पर ‘काजू की खेती’ को प्रोत्साहित किया जा रहा है और यह किसानों को भी रास आने लगा है, तभी तो किसानों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरने के अभियान को शुरुआती सफलता भी मिलती नजर आने लगी है।

राज्य में कभी सूखा, कभी अतिवृष्टि और कभी अधिक उत्पादकता किसानों के लिए समस्या लेकर आती है। यह स्थिति किसान के लिए नुकसान का सौदा बन जाती है। यही कारण है कि किसानों को एक तरफ सरकार तमाम तरह की रियायत दे रही है तो दूसरी ओर खेती-पशुपालन के क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित कर रही है। काजू की खेती भी उनमें से एक है।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारी बताते है कि काजू और कोको विकास निदेशालय, कोच्चि (केरल) ने राज्य के बैतूल, छिन्दवाड़ा, बालाघाट और सिवनी जिले की जलवायु को काजू की खेती के लिए उपयुक्त पाया है। इसी के चलते इन जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना ‘रफ्तार’ में इस वर्ष काजू क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम को लागू किया गया है। इन जिलों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग के किसानों ने कुल 1,430 हेक्टेयर क्षेत्र में काजू के एक लाख 60 हजार पौधों का रोपण किया है। इसके अलावा एक लाख 26 हजार पौधे और उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

आधिकारिक ब्योरे के अनुसार, अब तक बैतूल में 1,000, छिंदवाड़ा में 30, बालाघाट और सिवनी में 200-200 किसानों ने अपनी जमीन पर काजू के पेड़ रोपे हैं। औसतन सभी किसानों ने एक-एक हेक्टेयर क्षेत्र में काजू के पौधे रोपे हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 200 पेड़ रोपे गए हैं, प्रति पेड़ के बीच की दूरी सात मीटर की होती है। 

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो काजू का एक पेड़ औसतन 15 किलो फल का उत्पादन करता है। इस तरह एक हेक्टेयर में 200 पेड़ से कुल 3000 किलो काजू पैदा हो सकता है। बाजार में काजू की कीमत 600 रुपये भी आकी जाए तो औसत तौर पर एक हेक्टेयर से किसान को 18 लाख रुपये प्रति वर्ष की आमदनी हो सकती है।

राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव का कहना है, “सरकार की ओर से किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के प्रयास जारी हैं, किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ किया गया है, बिजली बिल आधा कर दिया गया, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी 50 प्रतिशत की गई है। इसी तरह किसानों को नगदी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। काजू की खेती भी उसी दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।”

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