‘देश के सबसे प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान IIT में महिलाओं की सिर्फ 10 फीसदी भागीदारी’

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कोलकाता: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में देश की आधी आबादी यानी महिलाओं की भागीदारी महज 10 फीसदी है, जबकि ये 50 फीसदी होनी चाहिए, इसलिए सरकार उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव प्रो.आशुतोष शर्मा ने गुरुवार को ये बात कही. इंडिया इंरटनेशनल साइंस फेस्टिवल-2019 के तीसरे दिन महिला वैज्ञानिक व उद्यमी सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद प्रो.शर्मा ने कहा कि महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में लाए जाने पर वे अगर पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बनती हैं तो उनसे प्रभावित होकर लड़कियां विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के प्रति उत्साहित होंगी.

प्रो.शर्मा ने कहा, ” हमने कोशिश की है कि नेतृत्व की भूमिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, जिससे वे रोल मॉडल बनें. उन्होंने बताया कि पिछले दो साल में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग यानी डीएसटी के 19 प्रमुख संस्थानों में से चार की निदेशक महिलाएं हैं.”

बतौर डीएसटी सचिव उन्होंने कहा, “देशहित में तीन कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिनमें एक स्कीम यह है कि महिलाओं के कॅरियर में विराम आने के दौरान उनको ड्रॉप आउट नहीं किया जाना चाहिए, और वह अपने मूल संस्थान में फेलोशिप लेकर अपने अनुसंधान को तब तक जारी रख सकती हैं, जब तक उनको स्थायी नौकरी नहीं मिल जाती.”

सचिव ने कहा कि दूसरी स्कीम यह है कि विज्ञान पढ़ने वाली महिलाएं सामाजिक कार्य कर सकती हैं. वे कृषि के क्षेत्र में किसानों के लिए काम कर सकती हैं. स्कूलों में बच्चों के साथ और स्वास्थ्य सेवा का काम कर सकती हैं. इसके अलावा, तीसरी स्कीम यह है कि उनको बौद्धिक संपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण के लिए एक साल की फेलोशिप दी जाती है.”

प्रो.शर्मा ने बताया कि बौद्धिक संपदा प्रबंधन की देश में काफी मांग है और सही मायने में देश के 10 फीसदी बौद्धिक संपदा प्रबंधन पेशेवरों को इस कार्यक्रम के जरिए तैयार किया गया है और इस कार्यक्रम के तहत करीब 1,000 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और उनको बहुत अच्छी नौकरियां मिली हैं. यह बहुत बड़ी कामयाबी की मिसाल है.

उन्होंने कहा, “हम एक नई स्कीम शुरू करने जा रहे हैं, जिसका नाम विज्ञान ज्योति है. यह एक बड़ा कार्यक्रम है जो अगले साल से शुरू होने जा रहा है. इसके तहत हर साल बोर्ड परीक्षा में बेहतर करनेवाली 50,000 लड़कियों का चयन किया जाएगा. उनके लिए कोचिंग शिविर की व्यवस्था की जाएगी.”

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