अयोध्या मामला: कोर्ट ने रामलला को दी विवादित जमीन, बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने किया फैसले का स्वागत

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नई दिल्ली: अयोध्या विवाद पर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने पूरी विवादित ज़मीन रामलला को दे दी है. सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं पर 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन दी जाएगी. कोर्ट इस फैसले के बाद बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं.

फैसले से पहले बातचीत में भी इकबाल अंसारी ने कहा था कि फैसला जो कुछ भी होगा हम उसका सम्मान करेंगे. फैसले के मद्देनजर अंसारी ने कहा था कि सभी नेता और समाज के प्रतिनिधित्व करने वाले वर्ग यही संदेश दे रहे हैं कि अदालत का फैसला माना जाएगा और उस फैसले को लेकर कोई भी ऐसी बात न की जाए जिससे किसी को तकलीफ हो.

अंसारी ने कहा था कि शीर्ष अदालत जो भी फैसला करेगी, हमें मान्य होगा. उन्होंने कहा कि यह कोई जीत-हार का फैसला नहीं है, बल्कि इससे तो दोनों समुदायों के बीच का द्वेष खत्म हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है. कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि तीन पक्ष में जमीन बांटने का हाई कोर्ट फैसला तार्किक नहीं था. कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी वैकल्पिक ज़मीन देना ज़रूरी है.

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने में ट्र्स्ट बना कर फैसला करे. ट्रस्ट के मैनेजमेंट के नियम बनाए, मन्दिर निर्माण के नियम बनाए. विवादित जमीन के अंदर और बाहर का हिस्सा ट्रस्ट को दिया जाए.” कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन मिले. या तो केंद्र 1993 में अधिगृहित जमीन से दे या राज्य सरकार अयोध्या में ही कहीं दे.

अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाली पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर 2019 को अयोध्या मामले पर सुनवाई पूरी हुई थी. 6 अगस्त से लगातार 40 दिनों तक इसपर सुनवाई हुई थी.

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने कहा- हमारी जमीन रामलला को दे दी गई, हमसे इससे सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि हम अपने साथी वकीलों के साथ चर्चा करके तय करेंगे कि रिव्यू पिटीशन दायर करनी है या नहीं.

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