करतारपुर गलियारे से गुजरने वाले श्रद्धालु क्या करें, क्या न करें

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डेरा बाबा नानक (पंजाब), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को करतारपुर कॉरिडोर में इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का उद्घाटन किया, जो पंजाब के गुरदासपुर जिले में भारत और पाकिस्तान के बीच सात दशकों में पहला धार्मिक लिंक है। इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के उद्घाटन से भारतीय तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान के गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने की सुविधा मिली। लेकिन श्रद्धालुओं को अपना पंजीकरण कराना आवश्यक है।

भारत ने 24 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर जीरो पॉइंट पर 4.2 किलोमीटर लंबे चार-लेन वाले करतारपुर साहिब कॉरिडोर के परिचालन के तौर-तरीकों पर पाकिस्तान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

करतारपुर साहिब, जिसे मूल रूप से गुरुद्वारा दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है, पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है और माना जाता है कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव यहां अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। उनकी 550वीं जयंती 12 नवंबर को पड़ती है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22 नवंबर, 2018 को गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर को पूरे देश और दुनियाभर में भव्य और शानदार तरीके से मनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।

मंत्रिमंडल ने भारत के तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए डेरा बाबा नानक से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण और विकास को मंजूरी दे दी, ताकि करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब का दौरा आसानी से किया जा सके।

अमृतसर-गुरदासपुर हाइवे से डेरा बाबा नानक को जोड़ने वाला 4.2 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर 120 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।

अत्याधुनिक यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण 15 एकड़ में किया गया है। एक हवाईअड्डे के समान दिखने वाले पूरी तरह वातानुकूलित इमारत में एक दिन में लगभग 5,000 तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 50 से अधिक इमिग्रेशन काउंटर हैं।

इसमें मुख्य भवन के अंदर कियोस्क, वॉशरूम, चाइल्डकेयर, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, प्रार्थना कक्ष और स्नैक्स काउंटर जैसी सभी आवश्यक सार्वजनिक सुविधाएं हैं।

सीसीटीवी सर्विलांस और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के साथ मजबूत सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर रखा गया है।

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 300 फीट का राष्ट्रीय ध्वज भी फहरा रहा है।

पाकिस्तान के साथ किया गया समझौता करतारपुर कॉरिडोर के संचालन के लिए एक औपचारिक ढांचा प्रदान करता है।

समझौते के अनुसार, भारतीय मूल के सभी धर्मों और व्यक्तियों के भारतीय श्रद्धालु गलियारे का उपयोग कर सकते हैं। यात्रा वीजा मुक्त होगी। तीर्थयात्रियों को केवल एक वैध पासपोर्ट ले जाने की आवश्यकता है। भारतीय मूल के व्यक्तियों को अपने देश के पासपोर्ट के साथ ओसीआई कार्ड ले जाने की आवश्यकता है और गलियारा सुबह से शाम तक खुला रहेगा।

सुबह यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन वापस लौटना होगा और गलियारे को अधिसूचित दिनों को छोड़कर, पूरे साल चालू रखा जाएगा।

तीर्थयात्रियों के पास व्यक्तिगत रूप से या समूहों में जाने के लिए और पैदल यात्रा करने का भी विकल्प होगा। भारत यात्रा की तारीख से 10 दिन पहले तीर्थयात्रियों की सूची पाकिस्तान को भेजेगा।

पुष्टि यात्रा की तारीख से चार दिन पहले तीर्थयात्रियों को भेजी जाएगी और पाकिस्तान की ओर से भारत को ‘लंगर’ और ‘प्रसाद’ के वितरण के लिए पर्याप्त व्यवस्था का आश्वासन दिया गया है।

प्रत्येक तीर्थयात्री के लिए पोर्टल ‘प्रकाशपर्ब550डॉटएमएचएडॉटजीओवीडॉटइन’ पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना जरूरी होगा और किसी भी दिन यात्रा करने के लिए अपनी पसंद बताना होगा।

तीर्थयात्रियों को यात्रा की तारीख से तीन से चार दिन पहले पंजीकरण की पुष्टि के संबंध में एसएमएस और ईमेल द्वारा सूचित किया जाएगा।

एक इलेक्ट्रॉनिक यात्रा प्राधिकरण भी जेनरेट किया जाएगा। यात्री टर्मिनल भवन में पहुंचने पर तीर्थयात्रियों को अपने पासपोर्ट के साथ ऑथरिजेशन (अनुमति) ले जाना होगा।

हालांकि, इस्लामाबाद द्वारा लगाए गए 20 डॉलर सेवा शुल्क वाला मुद्दा अनसुलझा रहा। इसका मतलब है कि प्रत्येक आगंतुक को सेवा शुल्क का भुगतान करना होगा।

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