मंदिर आंदोलन से गोरक्षपीठ का 9 दशक पुराना नाता

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी गोरक्षपीठ का अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से नौ दशक पुराना नाता रहा है। योगी जिस गोरखनाथ मठ के महंत हैं, मंदिर आंदोलन वहीं से शुरू हुआ था, जिसका शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ समापन हो गया। कोर्ट ने विवादित भूमि पर मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया है। 

योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ और अवैद्यनाथ के गुरु महंत दिग्विजय नाथ का इस आंदोलन में खास योगदान रहा है। ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ के गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की अगुआई में आजादी से पहले भी राम जन्मभूमि आंदोलन चला था। दिग्विजयनाथ के निधन के बाद उनके शिष्य ने आंदोलन को आगे बढ़ाया। वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे।

गोरक्षपीठ की गतिविधियों को काफी नजदीक से जानने वाले गिरीश पांडेय ने बताया कि “मुख्यमंत्री योगी गोरखपुर स्थित जिस गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर हैं, उसका राम मंदिर से करीब 85 साल पुराना नाता है। उनके गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की अगुआई में सन् 1934 से 1949 तक राम जन्मभूमि आंदोलन चला था। 22-23 नवंबर, 1949 को जब विवादित ढांचे में रामलला का प्रकटीकरण हुआ तो वह गोरखनाथ मंदिर में संत समाज के साथ एक संकीर्तन में भाग ले रहे थे। योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ 1983-84 से शुरू राम जन्मभूमि आंदोलन के शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं में शुमार थे।”

पांडेय ने बताया कि “वह राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष व राम जन्मभूमि न्यास समिति के सदस्य थे। सन् 1986 में जब फैजाबाद (अब अयोध्या) के जिला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को पूजा करने के लिए विवादित ढांचे का ताला खोलने का आदेश दिया, उस समय भी महंत अवैद्यनाथ वहां मौजूद थे।”

पांडेय के अनुसार, योग व दर्शन के मर्मज्ञ अवैद्यनाथ के राजनीति में आने का मकसद ही राम के उदात्त चरित्र के जरिए हिंदू समाज की कुरीतियों को दूर करना और राम मंदिर आंदोलन को गति देना था।

उन्होंने बताया कि “अवैद्यनाथ के बाद उनके उत्तराधिकारी और पीठाधीश्वर के रूप में आदित्यनाथ ने बड़े करीने से गुरुदेव के सपने का अपना सपना बनाया। विपक्ष की आलोचनाओं के बावजूद बतौर मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या, वहां के संतसमाज और लोगों से मधुर संबंध कायम रखे। इस क्रम में वह कुछ अंतराल बाद अयोध्या जाते रहे। मंदिर के बारे में होने वाले फैसले को उन्होंने देश के शीर्शस्थ अदालत पर छोड़ दिया और अयोध्या की बेहतरी के लिए उन्होंने खजाने का मुंह खोल दिया।”

उल्लेखनीय है कि महंत अवैद्यनाथ ने 1994 में योगी आदित्यनाथ को गोरक्षपीठ का अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। योगी आदित्यनाथ शुरू से हिन्दुत्व की राजनीति को आगे बढ़ाते रहे। उन्होंने महंत दिग्विजयनाथ और अवैद्यनाथ की तर्ज पर राममंदिर आंदोलन को आगे ले जाने का काम किया। योगी ने सियासत में अपने हिन्दुत्व चेहरे की एक अलग जमीन बनाई। उन्होंने हिन्दू युवा वाहिनी नामक संगठन भी बनाया।

आदित्यनाथ 1998 में सबसे कम उम्र के सांसद बने। अजय विष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने के बाद वह लगातार राममंदिर आंदोलन का अहम चेहरा बने रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका अयोध्या से नाता और गहरा हो गया।

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