Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश ओवैसी बोले- नहीं चाहिए पांच एकड़ जमीन की खैरात

0
21

नई दिल्ली: अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस इत्तिहादुल मुस्लमिन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि वो इस फैसले से खुश नहीं हैं. ओवैसी ने कहा है कि ऐसा नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट से गलती नहीं हो सकती है. उन्होंने कहा कि हमें पांच एकड़ जमीन के खैरात की जरूरत नहीं है.

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ”देश का मुसलमान उत्तर प्रदेश में पांच एकड़ जमीन खरीद सकता है. हमारी लड़ाई जस्टिस के लिए थी, हमें खैरात की जरूरत नहीं है. जिन लोगों ने 1992 में ढांचा गिराया था उन्हें ही मंदिर बनाने का अधिकार दे दिया है.” उन्होंने कहा कि ”कोर्ट ने माना है कि वहां मंदिर नहीं था. मेरी राय है कि पांच एकड़ जमीन नहीं लेना चाहिए.”

एआईएमआईएम के चीफ ने कहा है कि ”मैं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से सहमत हूं. हम हक के लिए लड़ रहे थे. हमें पांच एकड़ जमीन नहीं चाहिए. हमें किसी की भीख की जरूरत नहीं है. हमें खैरात नहीं चाहिए. पर्सनल लॉ बोर्ड को जमीन लेने से इनकार कर देना चाहिए.”

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है. कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि तीन पक्ष में जमीन बांटने का हाई कोर्ट फैसला तार्किक नहीं था. कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी वैकल्पिक ज़मीन देना ज़रूरी है.

कोर्ट ने कहा कि ”केंद्र सरकार तीन महीने में ट्र्स्ट बना कर फैसला करे. ट्रस्ट के मैनेजमेंट के नियम बनाए, मन्दिर निर्माण के नियम बनाए. विवादित जमीन के अंदर और बाहर का हिस्सा ट्रस्ट को दिया जाए.” कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन मिले. या तो केंद्र 1993 में अधिगृहित जमीन से दे या राज्य सरकार अयोध्या में ही कहीं दे.

अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाली पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर 2019 को अयोध्या मामले पर सुनवाई पूरी हुई थी. 6 अगस्त से लगातार 40 दिनों तक इसपर सुनवाई हुई थी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.