Explained: दिल्ली की 1800 अवैध कॉलोनियां होंगी नियमित, 79 गांवों का शहरीकरण, 40 लाख लोगों की बल्ले-बल्ले

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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली में अवैध कॉलोनियों में रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने के लिए कानूनी रूपरेखा मुहैया कराने वाले बिल को बुधवार को मंजूरी दे दी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी दी. यह प्रस्ताव राष्ट्रीय राजधानी के 175 वर्ग किलोमीटर में फैली लगभग 1,800 अवैध कॉलोनियों पर लागू होगा. सरकार के इस फैसले से करीब 40 से 50 लाख लोगों को फायदा होगा. मंत्रिमंडल ने हाल ही में मालिकाना हक देने का फैसला लिया था और बुधवार को उसने विधेयक को मंजूरी दे दी. यह विधेयक संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किया जाना है.

इससे पहले 23 अक्टूबर को मंत्रिमंडल ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके तहत दिल्ली के 175 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली लगभग 1,800 अनधिकृति कॉलोनियों की पहचान कर उन्हें नियमित करने की बात कही गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में इन कॉलोनियों के कल्याण संघों के कुछ प्रतिनिधियों से भेंट के दौरान कहा था कि निर्णय को लागू करने के लिए एक विधेयक लाया जाएगा. इस मामले पर दिल्ली में लगातार सियासत होती रही है. गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली में आप सरकार ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार अपने वादे के मुताबिक विधेयक नहीं लाएगी.

इसी हफ्ते पेश हो सकता है बिल

फिलहाल संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब सरकार इसे जल्द से जल्द संसद में पेश करना चाहती है. संभावना है कि सरकार इसी हफ्ते के बाकी बचे 2 दिनों में बिल को संसद में पेश कर देगी. संसद से मंजूरी मिलने के बाद बिल कानून का रूप ले लेगा और अवैध कॉलोनियां नियमित हो जाएंगी.

अवैध मकानों की रजिस्ट्री हो सकेगी

बिल में इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए अब अपने अपने घरों की रजिस्ट्री का प्रावधान रखा गया है. फिलहाल इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग अपने मकानों की रजिस्ट्री नहीं करवा सकते हैं. उन्हें अपनी संपत्ति पावर ऑफ अटॉर्नी या अन्य माध्यमों से खरीदनी बेचनी पड़ती है. बिल में मकानों की रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्रेशन फीस और स्टैम्प ड्यूटी में एक बार छूट देने का भी प्रावधान किया गया है. मकान की रजिस्ट्री नहीं होने से इन लोगों को मकान बनाने के लिए बैंकों से लोन भी नहीं मिल पाता है.

अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने से ये होगा फायदा-

– लोगों को उनके घर का मालिकाना हक मिलेगा.

– घरों की रजिस्ट्री होगी.

– घर खरीदना और बेचना आसान और कानूनी हो जाएगा.

– अनाधिकृत कॉलोनियों में घर के निर्माण या खरीद के लिए बैंक से लोन नहीं मिलता था नियमित होने पर लोन मिलने लगेगा.

– अनधिकृत कॉलोनियों में एमसीडी और केंद्र सरकार के फंड के जरिए विकास कार्य होंगे जो कि अब तक नहीं होते थे.

– वहीं इन इलाकों में सर्कल रेट लागू होने से घरों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होगी.

अनाधिकृत इलाके में कोई सुविधाएं नहीं होती हैं

जो इलाके अनाधिकृत होते हैं वहां कोई सुविधाएं नहीं होती हैं. हाल ही में केजरीवाल सरकार ने सेप्टिक टैंक की सफाई फ्री में जल बोर्ड से कराने का एलान किया है. यहां सीवर लाइन से कनेक्ट ना होने से सेप्टिक टैंक होते हैं जिनकी सफाई खुद लोग कराते हैं क्योंकि ये अनाधिकृत कॉलोनी है.

अनिल बैजल ने पीएम उदय योजना को दी मंजूरी

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने पीएम उदय योजना (पीएम-दिल्ली अनाधिकृत कालोनी आवास अधिकार योजना) के तहत दिल्ली के अनाधिकृत कॉलोनियों के लोगों को भू-स्वामित्व का हक दिलाने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके तहत दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 81 के सभी मामलों को वापस लेना और दिल्ली म्यूनिसिपल कारर्पोशन अधिनियम की धारा 507 के तहत 79 गांवों का शहरीकरण शामिल है. उपराज्यपाल ने ‘दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम’ 1954 की धारा 81 के तहत अनाधिकृत कॉलोनियों के निजी भूमि से संबंधित दर्ज सभी मामलों को वापस लेने के निर्देश जारी किए.

दिल्ली के एलजी ने 79 गांवों के शहरीकरण को मंजूरी दी

उपराज्यपाल ने दिल्ली के अनाधिकृत कॉलोनियों में तेजी से विकास कार्य करने के लिए दिल्ली म्यूनिसिपल कारर्पोशन अधिनियम की धारा 507 के तहत 79 गांवों के शहरीकरण को मंजूरी दी है. इसके अलावा दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम धारा 507 के तहत शहरीकृत घोषित किए गए ग्रामीण कॉलोनियों में दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा विकास कार्य योजना तैयार होगी जिससे कि स्थानीय नगर निकाय इन कॉलोनियों में नागरिक एवं मूलभूत सामुदायिक सुविधाएं दी जा सकें. इससे इन कॉलोनियों का तेजी से विकास होगा.

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