रेलवे हादसों से ऐसे मिलेगी निजात, ट्रायल सफल हुआ तो पटरियों की जांच अब अल्ट्रा सॉनिक मशीनें करेंगी

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नई दिल्ली:  आधुनिक तकनीक से लैस होती रेलवे ने एक कदम और आगे बढ़ाया है. अगर ट्रायल परफेक्ट रहा तो जल्द ही रेल पटरियों पर एक सुपर मशीन दिखाई देगी. रूस से आई इस मशीन का नाम ‘अल्ट्रा सॉनिक फ्लो डिटेक्शन’ है. रेल पटरियों पर होने वाले हादसे से बचने के लिए रूस से फिलहाल दो सुपर मशीनों को मंगा गया है. जिन्हें ट्रायल के लिए दिल्ली से रतलाम और दिल्ली से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली से रतलाम के बीच किये गये पहले ट्रायल का परिणाम संतोषजनक रहा. दूसरा ट्रायल नई दिल्ली से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग की पटरियों पर जारी है. इसके बाद इसका ट्रायल सबसे व्यस्त रूट दिल्ली से मुंबई और दिल्ली से कोलकाता के बीच किया जाएगा. इन रूटों पर ट्रायल अगर सफल रहा तो पूरे हिंदुस्तान के सभी रूटों के लिए मशीनों की खरीद का ऑर्डर कर दिया जाएगा.

क्या है मशीन का काम और कैसे होती है संचालित ?

ट्रेन के गुजरने से पहले रेल पटरी टूटे-फूटे होने की जानकारी सुपर मशीन के जरिए मिल जाएगी. अल्ट्रा सॉनिक फ्लो डिटेक्शन मशीन 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर रेल पटरियों की जांच करेगी. इससे पहले रेलवे में पैदल चाल यानी करीब 6 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से पटरियों की जांच करता था. इससे बहुत समय लगता था और जांच के सही होने पर भी दुविधा बनी रहती थी. पैदल चलते हुए जांच करने वाली मशीन को जब झटका लगता है तो पता चलता है कि पटरी टूटी हुई है. मगर अल्ट्रा सॉनिक फ्लो डिटेक्शन मशीन की बात करें तो ये एक गाड़ी पर काम करती है. ये मशीन सेंसर के जरिए रेलवे पटरियों के टूटे होने का पता बताती है.

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