नागरिकता संशोधन विधेयक अब सोमवार को लोकसभा में होगा पेश-सूत्र

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नई दिल्लीः सूत्रों के मुताबिक खबर आई है कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा. लोकसभा की बीएसी (बिजनेस एडवाइजरी कमिटी) में तय हुआ है कि नागरिकता संशोधन कानून लोकसभा में सोमवार का पेश किया जाएगा और मंगलवार को इस पर सदन में बहस होगी. बहस के लिए चार घण्टे का वक्त रखा गया है. पहले खबर आई थी कि नागरिकता संशोधन बिल आज लोकसभा में पेश होने वाला है लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

विपक्षी पार्टियां और सांसद कर रहे हैं विरोध
इस बिल का राजनीतिक तौर पर भारी विरोध हो रहा है और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि ये बिल संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के खिलाफ है. नागरिकता को लेकर एक देश में दो कानून कैसे हो सकते हैं. सरकार धर्म की बुनियाद पर ये कानून बना रही है. सरकार देश को बांटने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने भी कहा कि विधेयक असंवैधानिक है, क्योंकि इस विधेयक में भारत के मूलभूत विचार का उल्लंघन किया गया है.

क्या है नागरिकता संशोधन बिल?
भारत देश का नागरिक कौन है, इसकी परिभाषा के लिए साल 1955 में एक कानून बनाया गया जिसे ‘नागरिकता अधिनियम 1955’ नाम दिया गया. मोदी सरकार ने इसी कानून में संशोधन किया है जिसे ‘नागरिकता संशोधन बिल 2016’ नाम दिया गया है. नागरिकता संशोधन बिल में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध यानी कुल 6 समुदायों के लोगों को नागरिकता दी जाएगी. इसमें मुसलमानों का जिक्र नहीं है. नागरिकता के लिए पिछले 11 सालों से भारत में रहना अनिवार्य है, लेकिन इन 6 समुदाय के लोगों को 5 साल रहने पर ही नागरिकता मिल जाएगी. इसके अलावा इन तीन देशों के 6 समुदायों के जो लोग 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हों, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा.

विपक्ष का विरोध में है ये तर्क

विपक्ष का दावा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती है क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. ये विधेयक 19 जुलाई 2016 को पहली बार लोकसभा में पेश किया गया. इसके बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की थी. जेपीसी रिपोर्ट में विपक्षी सदस्यों ने धार्मिक आधार पर नागरिकता देने का विरोध किया था और कहा था कि यह संविधान के खिलाफ है. इस बिल में संशोधन का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि अगर बिल लोकसभा से पास हो गया तो ये 1985 के ‘असम समझौते’ को अमान्य कर देगा.

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