‘लाहली की विकेट का डर सिर्फ दिमाग में’

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नई दिल्ली, रोहतक के पास लाहली में बने स्टेडियम की पिच का डर घरेलू क्रिकेट में बल्लेबाजों को सताता आया है। यहां गेंदबाज स्थिति का भरपूर उपयोग करते हैं तो वहीं बल्लेबाजों को इन्हीं परिस्थति में परेशानी होती है, लेकिन शुभम रोहिल्ला और शिवम चौहान की कोशिश है कि वह बल्लेबाजों की इस मानसिकता को बदला जाए क्योंकि डर सिर्फ बल्लेबाजों के दिमाग में है। 

हरियाणा के इन दोनों बल्लेबाजों ने महाराष्ट्र के खिलाफ यहां खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी के मैच में शतक जमाए थे। 

रोहिल्ला ने 285 गेंदों पर 142 रन बनाए। वहीं चौहान ने अपने रणजी करियर का पहला शतक लगाया। इन दोनों बल्लेबाजों ने 221 की साझेदारी की। इन दोनों की पारियों के दम पर हरियाणा ने यह मैच पारी और 68 रनों से जीता। कप्तान हर्षल पटेल ने नौ विकेट अपने नाम किए जिसमें दूसरी पारी में लिए गए पांच विकेट भी हैं। अशीष हुड्डा ने कुल सात विकेट लिए। 

रोहिल्ला सिर्फ 21 जबकि चौहान सिर्फ 22 साल के हैं। दोनों के लिए सिर्फ करियर शुरू हुआ है और दोनों का अंतिम लक्ष्य भारतीय टीम का हिस्सा बनना है। 

रोहिल्ला ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा सोच सिर्फ सकारात्मक रहने और खराब गेंदों पर रन बनाने की थी। 

उन्होंने कहा, “सोच साफ थी और मैं सकारात्मक रह खराब गेंदों का पूरा इस्तेमाल करना चाहता था। मैं स्ट्राइक रोटेट करने पर ध्यान दे रहा था क्योंकि इससे गेंदबाजों की लय तोड़ने में मदद मिलती है। शिवम के साथ अच्छी साझेदारी हुई। हमारी सोच साफ थी कि हम ज्यादा से ज्यादा खराब गेंदों का इस्तेमाल करें।”

उन्होंने कहा, “आप लगातार स्थिति के बारे में नहीं सोच सकते। परिस्थतियां बल्लेबाजों के विपरीत हैं इसलिए जरूरी है कि आपकी मानसिकता साफ हो और अगर आप खराब गेंदों को जाया कर देंगे तो दवाब आपके ऊपर होगा। जाहिर सी बात हैं चीजें आपके पक्ष में होनी चाहिए हो किस्मत से रहीं। मैं खुश हूं कि पहला मैच अच्छा रहा और इससे हमें आगे के सीजन में जाने से मदद मिलेगी।”

चौहान ने भी रोहिल्ला की बात को दोहराते हुए कहा, “यह मेरा पहला शतक था इसलिए खास तो है लेकिन मैं लाहली की सोच को अपने दिमाग से बाहर करना चाहता था। मैंने यहां काफी क्रिकेट खेली है और परिस्थतियों पर ज्यादा ध्यान देना आपके लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि ध्यान सही जगह रहे और विकेट गेंदबाजों की मददगार है इस पर ध्यान न देते हुए सकारात्मक रहने पर ध्यान दूं। मैं सकारात्मक रहकर गेंद को अच्छे से देखने की कोशिश कर रहा था।”

रोहिल्ला के साथ साझेदारी के बारे में चौहान ने कहा, “यह मुश्किल परिस्थति थी क्योंकि हम पहले बल्लेबाजी कर रहे थे और अपने दो विकेट जल्दी खो चुके थे। मैं यहां खेल चुका हूं इसलिए मुझे पता था और मेरी कोशिश थी कि आगे क्या होगा इसके बारे में न सोच के एक समय में एक ही बारे में सोचूं।”

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