धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण का लाभ लेने के संगठित प्रयासों के खिलाफ संत समिति हुई मुखर

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नई दिल्ली: गैर-हिन्दू धर्म, इस्लाम या ईसाइयत में धर्मांतरण के बाद भी सामाजिक रुप से आरक्षण का लाभ लेने के संगठित प्रयासों के खिलाफ संत समिति मुखर हुई है. संत समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ऐसे संगठित प्रयास को रोकने का अनुरोध किया है. पिछले दिनों दलित ईसाइयों के संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर दलित ईसाइयों के लिए अनुसूचित जाति का आरक्षण मांगा था.

संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने मांग की है कि भारत सरकार को सरकारी अभियान चलाकर ऐसे धर्मांतरित हुए विभिन्न जातियों के व्यक्ति जो कि आरक्षण की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें इस्लाम अथवा ईसाइयत स्वीकार करने के कारण इस सुविधा से वंचित किया जाए.

संत समिति ने अपने पत्र में कहा है कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के आरक्षण की व्यवस्था नहीं देता है. संत समिति का मानना है कि इस तरह से आरक्षण की सुविधा का इस्तेमाल करने या उसकी मांग करने से इन धर्मों का पाखंड भी सामने आता है, जो धर्मांतरण के दौरान ये दावा करते हैं कि इस्लाम और ईसाइयत में सभी व्यक्ति एक बराबर हैं. लेकिन फिर धर्मांतरित दलित के लिए आरक्षण की मांग करते हैं.

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