रेप के दोषी कुलदीप सेंगर को बचाने में जुटी योगी सरकार- समाजवादी पार्टी

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नई दिल्ली: रेप के मामले में मुजरिम करार दिए जा चुके कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिर एक नए आरोप का ठीकरा फोड़ दिया है. मंगलवार रात पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आई.पी. सिंह ने कहा कि बीजेपी की करनी और कथनी में फर्क है.

आई.पी. सिंह ने कहा, “योगी की सरकार खुद और बीजेपी को बेदाग बताने का सिर्फ ढोंग करती है. हकीकत अगर देखनी है तो आमजन सिर्फ एक नजर केवल दुष्कर्म के मुजरिम उन्हीं के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के कुकर्मो पर डाल लें. इसमें कोई विरोधी पार्टी भला क्या करेगी? योगी और बीजेपी अगर पाक-साफ हैं तो फिर, मुजरिम करार दिए जाने के बाद भी कुलदीप की विधानसभा सीट खाली घोषित करने में वे क्यों शरमा रहे हैं? यही है बीजेपी की करनी और कथनी में फर्क.”

सपा में बेबाक बोलने के लिए पहचाने जाने वाले राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आगे कहा, “इसमें कोई झूठ नहीं है कि इस वक्त बीजेपी यूपी और केंद्र में राज कर रही है. मगर तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि, बीजेपी कहीं कोई जनहित का काम भी नहीं कर रही है. इसके लिए यूपी सरकार से बड़ा नमूना भला क्या होगा? जो बलात्कारी विधायक को खुलेआम शरण दे रही है. बिना उस जनता से डरे हुए जिसने राज्य में बीजेपी को भूलवश सत्ता सौंप दी थी.”

आई.पी. सिंह ने कहा, “राज्य की सरकार जो कुछ कर रही है उस पर नजर रखने के लिए राज्यपाल हैं. सूबे में मौजूद सरकार के इन बिगड़े हालातों में राज्यपाल को खुद ही संज्ञान लेना चाहिए. राज्यपाल के विशेषाधिकार के तहत किसी से कुछ नहीं पूछना है. वे चाहें तो पलक झपकते कुलदीप सेंगर की विधानसभा सीट को खाली घोषित करा सकती हैं. मगर उनकी भी एक अदद चुप्पी सौ-सौ सवाल खड़ी करती है.”

क्या है पूरा मामला?
एक नाबालिग लड़की ने कुलदीप सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था. घटना पिछले साल जून की है. न्याय की मांग को लेकर आरोप लगाने वाली लड़की ने सीएम योगी के घर के बाहर आत्मदाह की कोशिश की थी. इसी महीने की तीन तारीख को पीड़िता के पिता की जेल में संदिग्ध परिस्थियों में मौत हो गई थी. पीड़िता ने विधायक कुलदीर सेंगर पर जेल में हत्या कराने का आरोप भी लगाया था.

कौन हैं कुलदीप सेंगर?
अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में सेंगर कांग्रेसी थे. 2002 के चुनावों से पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और कांग्रेस के प्रत्याशी को बड़े अंतर से हरा दिया. 2007 आते-आते उनकी छवि बाहुबली की बन गई थी. पार्टी की इमेज की खातिर माया ने उन्हें साइडलाइन कर दिया. तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया.

2007 में एक बार फिर वह विधायक बन गए. 2012 में भी सपा के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता और 2017 में बीजेपी के टिकट पर वह विधायक बन गए. यानि 2002 से वो लगातार विधायक हैं और अपने राजनीतिक करियर में यूपी की सभी अहम पार्टियों में रहे हैं. 2002 से 2017 के बीच वो बीएसपी, एसपी से विधायक रहे हैं और इस मामले के बाद बीजेपी ने उव्हें विधायक पद से हटा दिया.

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