वॉशिंगटन: अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर कहा है कि मैं कानून के तहत समान सुरक्षा के सिद्धांत की वकालत करती हूं. दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने जम्मू-कश्मीर में नजरबंद नेताओं को रिहा करने की भी बात की.

उन्होंने कहा, “भारत की यात्रा के दौरान मुझे सीएए को लेकर अधिक बातें सुनने को मिली. वहां जो कुछ भी चल रहा है, मैं इसे एक लोकतांत्रिक तरीका कहूंगी. वहां पर लोग सड़कों पर हैं. इसको लेकर राजनीति, मीडिया और अदालतों में बहस चल रही है. मैं कानून के तहत समान सुरक्षा के सिद्धांत की वकालत करती हूं.” बता दें कि सीएए को लेकर देशभर में कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

नई दिल्ली में रायसीना संवाद के अलावा क्षेत्र की यात्रा के बाद हाल ही में वेल्स अमेरिका लौटीं हैं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर को लेकर कहा कि जम्मू कश्मीर पर मुझे कुछ प्रगति देखकर खुशी हुई जिसमें कश्मीर में इंटरनेट सेवा आंशिक रूप से बहाल करना शामिल है. वेल्स ने जम्मू कश्मीर में अमेरिकी राजदूत और अन्य विदेशी राजनयिकों की यात्रा को ‘‘सार्थक कदम’’ करार दिया.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हम भारत सरकार से लगातार अनुरोध करते हैं कि हमारे राजनयिकों को कश्मीर में बिना की बाधा के पहुंचने दिया जाए. साथ ही, सरकार नजरबंद रखे गए कश्मीरी नेताओं को रिहा करे. बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया था. इसी के मद्देनजर मुख्यधारा के नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया था.

वेल्स ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पिछले दो दशक से भारत अपने रणनीतिक क्षितिज का विस्तार कर रहा है जिसका परिणाम यह निकला है कि वह निष्क्रिय विदेश नीति से दूर होकर जोर-शोर से अपने हितों पर ध्यान दे रहा है. उन्होंने कहा रक्षा सहयोग, शांति रक्षा अभियानों, अंतरिक्ष, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, व्यापार, लोगों के बीच आपसी संपर्क पर निरंतर प्रगति के साथ ही भारत-अमेरिका नौसेना सहयोग की गुणवत्ता और निरंतरता, खासतौर से सूचना को साझा करने में अभूतपूर्व प्रगति हुई है.

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