केरल और पंजाब के बाद अब राजस्थान में भी पास हुआ नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव

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जयपुर, एएनआइ। राजस्थान सरकार ने शनिवार को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रस्ताव विधानसभा में पास कर दिया है। केरल और पंजाब के बाद राजस्थान अब ऐसा तीसरा राज्य बन गया है, जहां सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ है। 

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है। विधानसभाएं इन प्रस्तावों को पारित करके संविधान द्वारा दी गई सीमित स्वायत्तता से परे जा रही हैं। यह देश को विभाजित करने के लिए एक साजिश है और इसे बिल्कुल स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

भाजपा ने किया कड़ा विरोध

राजस्थान में शुक्रवार यानी 24 जनवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया है। सत्र के दूसरे दिन ही सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया गया। राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी पहले ही दे दी थी। वहीं, आज प्रस्ताव पास होने से पहले विधानसभा में चर्चा हुई थी, जिसमें भाजपा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।

विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शनिवार को जब सदन में प्रस्ताव पेश किया गया तो विपक्ष ने जमकर विरोध किया। भाजपा सदस्य वेल में चले आए और सीएए के समर्थन में नारे लगाए। इससे पहले एससी-एसटी आरक्षण को बढ़ाने वाला 126वां संशोधन प्रस्ताव पारित किया गया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विधानसभा में उठाए सवाल

विधानसभा में बहस के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि जब संसद ने यह कानून (CAA) पारित कर दिया तो फिर आप इसे लागू क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून तो आपको लागू करना ही पड़ेगा। दुनिया की कोई ताकत इसे नहीं रोक सकती है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में भाजपा लोगों के बीच जागरुकता अभियान चला रही है। केंद्र सरकार के बड़े-बड़े मंत्री शहरों में रैली कर इस कानून को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों से लोगों को जागरुक कर रहें हैं।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए भारत में नागरिकता दी जा रही है। पहले भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था, लेकिन अब नए कानून में कहा गया है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता के पात्र हैं।

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