सरकार घाटे वाली कंपनियों की जमीन का इस्तेमाल अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए कर सकती है

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नई दिल्ली. सरकार घाटे वाली कंपनियों की जमीनों का इस्तेमाल अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए कर सकती है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक इसके लिए कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल के बजट में कहा था कि पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए निर्माण कार्य ज्वाइंट डेवलपमेंट जैसे इनोवेटिव तरीकों से किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्र की कंपनियों की देशभर में मौजूद जमीनों पर बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकता है।

जीएलआईएस पर सरकारी इमारतों की डिटेल अपडेट की जा रही

सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक देश के हर शहरी परिवार के पास अपना घर हो। इस योजना का एक अहम हिस्सा अफोर्डेबल हाउसिंग है। न्यूज एजेंसी ने बताया कि कैबिनेट सचिवालय के निर्देशों के मुताबिक गवर्नमेंट लैंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीएलआईएस) पर सरकारी इमारतों की डिटेल अपडेट की जा रही है। जीएलआईएस पर केंद्र सरकार की अचल संपत्तियों का ब्यौरा रहता है।

आईडीपीएल के पास ऋषिकेश में 834 एकड़ जमीन

बहुत सी सरकारी कंपनियों के पास बड़े स्तर पर ऐसी जमीनें हैं जिन्हें री-डेवलप किया जा सकता है। इंडियन ड्रग एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (आईडीपीएल) इसका एक उदारहण है। आईडीपीएल के पास उत्तराखंड के ऋषिकेश में 834 एकड़ जमीन है। उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्कूटर इंडिया की काफी जमीन है।

अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत अब तक 32 लाख घरों का निर्माण, 60 लाख घरों का काम जारी
मोदी सरकार ने जून 2015 में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना मिशन लॉन्च किया था। हाउसिंग एंड अरबन अफेयर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक इस मिशन के तहत अब तक 32.07 लाख घर बनाए जा चुके हैं। 2022 तक कुल 1.03 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले दिनों लोकसभा में बताया था कि 60.50 लाख घरों का निर्माण जारी है।

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