कोरोना वायरस के चलते तेल-तिलहन में छाई मंदी, किसानों की परेशानी बढ़ सकती है

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नई दिल्ली. चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप गहराने से दुनियाभर के बाजारों में मंदी का माहौल है, जिससे कृषि उत्पाद बाजार भी प्रभावित हुआ है। पाम ऑयल के दाम में आई भारी गिरावट से भारत में तमाम तेल-तिलहनों में मंदी छा गई है, ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़ेगी क्योंकि रबी सीजन की फसल की आवक जोर पकड़ने पर उनको सरसों व अन्य तिलहन फसलों के भाव पर भी असर पड़ सकता है। 
चीन पाम ऑयल का प्रमुख आयातक है, लेकिन कोरोना वायरस फैलने के बाद चीन में उसके आयात पर काफी असर पड़ा है जिसके कारण पाम ऑयल के प्रमुख उत्पादक देशों मलेशिया और इंडोनेशिया में पाम ऑयल के भाव में भारी गिरावट आई है।
घरेलू बाजार में पाम ऑयल की कीमतें गिरी
पाम ऑयल दुनिया में सबसे सस्ता तेल में शुमार है, लिहाजा इसका भाव घटने से अन्य खाद्य तेलों में भी नरमी बनी हुई है। भारत में पाम ऑयल के दाम में बीते एक महीने में करीब 10 रुपए प्रति किलो की गिरावट आई है। पाम ऑयल सस्ता होने से सरसों, सोयाबीन, मूंगफली समेत अन्य तेलों के दाम में भी नरमी का रुख बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर पाम ऑयल का भाव एक महीने में जहां 824.4 रुपए प्रति 10 किलो तक चला गया था वहां गुरुवार को घटकर 723.5 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया।
एनसीडीएक्स पर सरसों की कीमतों में कमी आई
कृषि उत्पादों का देश में सबसे बड़ा वायदा बाजार नेशनल कमोडिटी एंड डेरीवेटिव्स इंडेक्स (एनसीडीएक्स) पर सरसों के फरवरी महीने के वायदा भाव में बीते एक महीने में 400 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। एनसीडीएक्स पर सरसों का भाव एक महीने पहले 13 जनवरी को 4,490 रुपए प्रति क्विंटल था जो गुरुवार को घटकर 4,039 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए सरसों का एमएसपी 4,425 रुपये प्रतिक्विंटल तय किया है।
सरसों के भाव न्यूनतम सर्मथन मूल्य से नीचे 
सॉल्वेंट एक्सट्रैर्क्‍स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी. वी मेहता ने का कहना है चीन खाने के तेल खासतौर से पाम तेल का एक बड़ा आयातक है, इसलिए चीन की खरीदारी प्रभावित होने से तेल-तिलहन बाजार में मंदी का माहौल है। देश के कुछ बाजारों में सरसों की अगैती फसल की आवक अभी शुरू ही हुई है लेकिन इसका दाम सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चल रहा है। ऐसे में अगले महीने से जब सरसों की आवक जोर पकड़ेगी तब भाव और नीचे आ सकता है। अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है तो किसानों को रबी तिलहनों का वाजिब दाम दिलाने के लिए सरकार को एमएसपी पर खरीदारी की व्यवस्था करनी होगी।

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