दो युगों के प्यार के अंतर को नहीं समझा पाई ‘लव आज कल’, इम्तियाज वाला जादू नहीं आया नजर

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बॉलीवुड डेस्क. प्यार और रोमांस की कहानियां सदाबहार होती हैं। फिर तो इन कहानियां को किसी भी प्लेटफॉर्म पर दिखाया-सुनाया जाए, दर्शक-श्रोता बड़े प्यार से और चटखारे लेकर देखते-सुनते हैं। हां, वैलेंटाइन डे जैसे विशेष दिन की बात हो तब इसे और हवा मिल जाती है। इसी अवसर को भुनाने के लिए निर्देशक इम्तियाज अली दर्शकों के लिए ‘लव आज कल’ लेकर।

ऐसी है आज कल के लव की कहानी

  1. फिल्म के नाम के मुताबिक इसकी कहानी को बयां करने के लिए एक 1990 का और दूसरा 2020 के युग के प्यार को दिखाया गया। दोनों युगों के प्यार की कहानी साथ-साथ चलती है जो जटिलता का कारण बनती है। कहानी के मुताबिक जोई (सारा अली खान) आज के जमाने की मॉर्डन लड़की है। उसकी प्राथमिकता कॅरिअर बनाना है, जबकि प्यार-मोहब्बत और लड़कों से दोस्ती करना उसके लिए टाइमपास है। जोई की मुलाकात प्रोग्रामिंग इंजीनियर वीर (कार्तिक आर्यन) से होती है। पहले प्यार के रूप में वीर अपनी लाइफ में जोई को स्पेशल मानता है लेकिन जब वीर उसे स्पेशल बताकर भी हम बिस्तर होने से इनकार कर देता है, तब यह बात जोई को नागवार गुजरती है और वह रिश्ता तोड़ देती है। 
  2. इसके बावजूद वीर, जोई का पीछा करता रहता है। जोई जहां काम करती है, वह वहां भी काम करने जाता है। जोई के बॉस रघु (रणदीप हुड्डा) होते हैं। रघु अपने प्यार की कहानियां जोई को सुनाकर यह जतलाने की कोशिश करते रहते हैं कि जोई के लिए वीर बहुत खास है। इसी बीच एक 1990 के दौर के युवाओं की प्रेम कहानी भी साथ चल रही है। एक साथ चल रही इन कहानियों समझ पाना जटिल तो है ही, साथ ही यह बड़ा कंफ्यूजन भी क्रिएट करती हैं।
  3. फिल्म में कार्तिक और सारा बीच लव मेकिंग और किसिंग सीन से लेकर वो सब कुछ है जिसे देखकर दर्शक सिनेमाघर तक खिंचे चले आएं। लेकिन साथ-साथ चलने वाली दोनों युगों की उलझी कहानी और खराब पटकथा की वजह से आज और कल के प्यार के अंतर को समझ पाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि मनोरंजन के लिए सिनेमाघर में 141 मिनट बिताना बोरिंग लगने लगता है। जाहिर-सी बात है कि 1990 से लेकर 2020 तक प्यार-रोमांस और लोगों की सोच में काफी अंतर आया है, जो रियल से लेकर रील लाइफ में भी दिखता है। अगर इसी भेद को बखूबी दिखाया गया होता, तब प्यार और किसिंग जैसी चीजें भी फिल्म में चार चांद लगा देतीं। गानों की बात की जाए तो अच्छे बोल होने के बावजूद कहानी में कोई कनेक्शन जोड़ते नहीं देते।
  4. हालांकि, अभिनय की बात करें तो कलाकारों पर शक नहीं किया जा सकता। कार्तिक आर्यन, सारा अली खान और रणदीप हुड्‌डा का अभिनय ठीक-ठाक रहा। फिल्म में रणदीप को कहानी सुनाने से ज्यादा कुछ करने को मौका नहीं मिला है। इन स्टार्स से ज्यादा लीना की भूमिका निभाने वाली नवोदित अदाकारा आरुषि शर्मा अदाकारी अच्छी लगती है। कम डायलॉग के बावजूद उन्होंने अपने किरदार में जान डालने की हरसंभव कोशिश की है। फिल्म देखें या नहीं… सारा-कार्तिक की केमिस्ट्री पसंद है तो देखें।

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