बिपाशा बोलीं- ‘करण और मैं साथ तो और किसी की जरूरत नहीं’, बॉलीवुड सेलेब्स ने साझा की रिश्ते की कहानी

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बॉलीवुड डेस्क (अमित कर्ण और उमेश उपाध्याय).  वैलेंटाइन डे पर दैनिक भास्कर ने बॉलीवुड सेलेब्स से बात की और उनके प्यार की कहानी के बारे में जाना। इस दौरान एक्ट्रेस बिपाशा बसु, सिंगर नीति मोहन, अभिनेता अंगद बेदी और सिंगर अदनान सामी की पत्नी रोया सामी खान ने अपनी लव लाइफ से जुड़ी रोचक और अनसुनी बातें शेयर की। किसने क्या कहा? डालते हैं एक नजर:- 

  1. करण (सिंह ग्रोवर) से पहली मुलाकात तो फिल्म ‘अलोन’ की रीडिंग के दौरान हुई थी। हम मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में मिले थे। उनका पहला इंप्रेशन तो मेरे मन पर यही पड़ा कि वह क्या हैंडसम इंसान है। बातचीत में महसूस हुआ कि वह काफी ह्यूमरस और फनी भी है। बड़ा अच्छा लगा मुझे कि चलो मेरा को-स्टार इस फिल्म में बहुत मजेदार रहने वाला है। इमीडीएटली मुलाकात के बाद तो महसूस नहीं हुआ था कि यह मेरे लाइफ पार्टनर बनेंगे।
  2. मुलाकात के पहले दिन के बाद से तो हमारे बीच दोस्ती मजबूत हुई। वह दिन है और आज का दिन है हम दोनों आज भी गहरे दोस्त हैं। सेट पर जब हम शूट नहीं भी कर रहे होते थे तो घंटों किसी टॉपिक पर बातें किया करते थे। आज भी हम वैसे ही हैं। साथ बैठे होते हैं तो घंटों बातें करणे में उकताहट नहीं होती। जब हम साथ हों तो हमें किसी तीसरे इंसान की जरूरत नहीं होती।
  3. फिर एक अरसे के बाद करण ने मुझे 31 दिसंबर 2015 को शादी के लिए सीधा प्रपोज किया था। वह प्रपोजल मेरे लिए बड़ा ही सरप्राइजिंग था क्योंकि मैं उस तरह का प्रपोजल एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी। वह इसलिए कि उससे एक दिन पहले ही हमारे बीच बड़ी सिली वाली फाइट हुई थी। मैं उससे बहुत नाराज थी। अगले दिन हमारी शूटिंग फायर वर्क्स के बीच थी। इसी बीच में करण आए मेरे पास और एक सेल्फी वीडियो में रिंग के साथ मुझे प्रपोज कर दिया कि शादी करणी है। मैं चौंक गई थी मेरे पास शब्द नहीं थे। मगर कुछ ही सेकेंड के बाद मैंने अपने सरप्राइस पर काबू पाया और रजामंदी दी। मैं आज जब उस पल और फैसले को देखती हूं तो बड़ी खुश होती हूं कि मेरा डिसीजन बिल्कुल सही था।
  4. करण की लाइफ बहुत चैलेंजिंग रही है। उनमें कई खुद को एक हद तक तबाह करणे वाली आदतें थीं। इसके बाद मैंने उन्हें जरूर सपोर्ट स्ट्रक्चर प्रदान किया लेकिन फाइनली यह उनका कॉल और विल पावर था जिसकी मदद से उन्होंने सारी बुरी आदतें खुद ही छोड़ दी। वहीं वह जब मेरी जिंदगी में आए तो मैंने जिंदगी को धैर्य के साथ जीना सीखा। मैं पहले बहुत बेचैन रहा करती थी। बड़ी शॉर्ट टैम्पर्ड भी थी। करण के जिंदगी में आने के बाद वह सारी आदतें मेरी सुधर गई।
  5. नेहा और मैं पहले भी दोस्त थे और आज भी दोस्त ही हैं। हमारा रिश्ता बहुत ही गहरा है। हम 10-11 सालों से एक दूसरे को जानते हैं। इसके बाद 2011 में मैंने सीधा जाकर नेहा के घरवालों से बात कर ली थी। वहां मैंने कहा कि कभी मेरी शादी होगी तो इनसे ही होगी। अगर इसे प्रपोज माने तो मैंने नेहा को 2011 में ही प्रपोज कर दिया था। शादी हो गई और अब तो फैमिली भी पूरी हो गई है। अब तो हमारे घर में दो-दो पॉवर हाउस हैं। एक मेरी पत्नी और दूसरी बेटी। पूरे घर में बस इन दोनों की ही चलती है लेकिन आज भी नेहा और मेरा एक दूसरे के प्रति दोस्त जैसा ही व्यवहार है। 
  6. नेहा की एक बात मुझे जो सबसे ज्यादा पसंद आती है, वह यह है कि वे सुपर वुमन की तरह हैं। वह अपना काम भी करती हैं, बेटी मेहर को भी देख लेती हैं और घर भी संभाल लेती हैं। इसके अलावा मेरा शूटिंग कैलेंडर डेट भी देख लेती हैं। मुझे लगता है कि यह खासियत एक स्त्री में ही होती है। इसके अलावा मैं अपनी पर्सनल लाइफ पर ज्यादा बात नहीं करता और उसे प्रोफेशनल लाइफ से बहुत अलग रखता हूं। मेरा मानना है कि इसे जितना अलग रखूंगा उतना ही आगे बढू्ंगा।
  7. पापा राजकुमार बड़जात्या पहले से ही बतौर डिस्ट्रीब्यूटर-निर्माता इंडस्ट्री में सक्रिय थे, लेकिन जब मैंने घर पर फिल्म निर्देशन की इच्छा जाहिर की तब मां ने मेरे सामने पहले शादी करणे की शर्त रख दी। तब मैं 21 साल का था और मां को यह डर था कि कहीं किसी हीरोइन के साथ मैं चक्कर न चला बैठूं, क्योंकि हमारी फैमिली में कोई डायरेक्टर तो था ही नहीं। 
  8. मैंने कहा कि मुझे तो डायरेक्टर ही बनना है, अगर उसके लिए यह शर्त है तब यह भी सही। उसके बाद 21-22 साल की उम्र में शादी हो गई और आज मेरी शादी को 33 साल पूरे हो चुके हैं। अब सोचता हूं तब समझ में नहीं आता कि इतनी जल्दी शादी कैसे हो गई। वह वक्त भी अलग था। मेरी वाइफ ग्वालियर की हैं और हमारे जो भी कहानी है उसे मैंने फिल्म ‘विवाह’ में दर्शाया है। दरअसल हमारी भी अरेंज मैरिज ही थी।
  9. उन्हें अपना हमकदम बनाने में वक्त नहीं लगा। वह दुआ बहुत जल्द कुबूल हो गई थी। हम 2002 नवंबर में मिले थे और दिसंबर में हमारी मंगनी हो गई। बहुत जल्द शादी भी हो गई। जिंदगी के प्रति मेरा बड़ा प्रैक्टिकल रवैया रहता है। उनका जरा अलग है। उनका लीप ऑफ फेथ में बड़ा यकीन है। मैं जर्मनी से आई हूं। पापा आर्मी में रहे हैं तो अनुशासन की आदत बचपन से रही है। वे लंबे समय तक बॉलीवुड से जुड़े रहे हैं। उनकी जीवनशैली उतनी अनुशासित नहीं रही। यहां इतना कॉम्पिटीशन है। फिर भी उन्हें कभी झल्लाते हुए नहीं देखा है। 
  10. मैं हर चीज में टेंशन लिया करती थी। वे ऐसे नहीं है। वे हमेशा कहते रहे हैं कि अल्लाह पर छोड़ दो। वह कर देगा। अदनान खुद तो बहुत कम खाते हैं, पर दूसरों को खाने खिलाने का बहुत शौक है। वैसा वह बेटी मदीना के साथ भी करते रहते हैं। मदीना उनकी जान है। मदीना के भी मन में जो भी फरमाइशें आती रहती हैं, वे सब तुरंत पूरी करते रहते हैं। उस मसले पर हमारी नोंकझोंक भी होती रहती है। इसके अलावा अदनान मुझे हर वैलेंटाइन डे पर सरप्राइज करणे की कोशिश करते रहे हैं, मगर ज्यादातर मौकों पर मैं उनका सरप्राइज प्लान समझ जाती हूं और वह स्पॉइल हो जाता है। उस पर वो मुझसे कहते हैं कि मुझे तो स्पाई एजेंट होना चाहिए था। 
  11. एक बार उन्होंने मुझे सरप्राइज देने के लिए दिल्ली बुलाया। वहां से हमें नॉर्थ में जाना था। दिल्ली पहुंचते ही मेरा दिमाग चलने लगा था। वहां से फिर हम जब नॉर्थ को रवाना हुए तो मैं समझ गई कि यह सरप्राइज प्लान का मामला लग रहा है। हालांकि मैंने तब प्रिटेंड ही किया कि मैं समझ नहीं रही। वह देख उन्हें बड़ी खुशी हुई थी। सरल शब्दों में कहूं तो वो दिल से फैसले लेने वालों में से हूं तो मैं दिमाग से। हमार शादी बडी आसानी से हुई। कैसे हुई, यह सोचकर मुझे भी बड़ी हैरत होती है। आर्मी बैकग्राउंड वाले मेरे पापा फिल्म वालों को अपनी बिटिया देने को एकदम राजी नहीं थ पर हमारे मामले में सब कुछ एकदम पानी की तरह हो गया। 
  12. अदनान बड़े ही केयरिंग इंसान हैं। मैं कभी पाकिस्तान भी नहीं गई थी। एक बार जब किसी काम से वहां जाना पड़ा तो अदनान जर्मनी से पूरे रास्ते मुझे फोन पर गाइड करते रहे। खैरियत से पहुंची की नहीं। वह केयर देख महसूस हुआ था कि वो कितना रेस्पेक्ट और प्यार करते हैं। 
  13. मेरे लिए वैलेंटाइन डे बहुत खास है। इस बार तो यह और भी स्पेशल है क्योंकि इसी दिन मेरी शादी की सालगिरह भी है और शादी के बाद पहला वैलेंटाइन डे भी। पक्का हस्बैंड मुझे कुछ सरप्राइज देने वाले हैं और हम कहीं रोमांटिक वीकेंड मनाने जा सकते हैं। हम दोनों हस्बैंड-वाइफ के रिश्ते में बहुत विश्वास है, यह विश्वास हमसे ज्यादा बहनों में भी दिखता है। मेरी बहनें जिस तरह से निहार (पति) को फोन करती हैं और अलग से मिलने का प्लान बना लेती हैं। वह दिखाता है कि मेरे परिवार ने उन्हें किस तरह अपना लिया है। 
  14. निहार के जरिए मेरे पैरेंट्स को एक बेटा मिल गया और मेरी बहनों को एक जीजा, दोस्त और भाई मिल गया है। मुझे तो उनकी जादू की झप्पी बहुत पसंद है। मुझे याद है जब मेरी शादी से एक दिन पहले पापा की तबीयत खराब हो गई और उन्हें हॉस्पिटलाइज होना पड़ा था। वो आईसीयू में भर्ती थे और हमें पता चला कि वह शादी में नहीं आ पाएंगे। ऐसे में निहार ने मुझसे कहा कि आप पर शादी का कोई प्रेशर नहीं है, अगर आप इसे पोस्टपोन करणा चाहें तो कर सकती हैं। 
  15. खैर, हमने डिसाइड किया कि शादी करेंगे, क्योंकि होश में आने पर पापा को यह फील नहीं होना चाहिए कि उनकी वजह से शादी रोक दी गई। जब मैं मंडप की तरफ बढ़ रही थी तब बहुत परेशान थी और मेरे मन में कई तरह के सवाल थे पर इसी बीच निहार ने मुझे अपना हाथ दिया और तब मैंने देखा कि उनकी आंखों में आंसू थे। उस वक्त उन्होंने मुझे एक जादू की झप्पी दी और उसके बाद तो जैसे सब कुछ ठीक हो गया। मुझे वह पल हमेशा याद रहेगा।

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