नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए भारत ने ठोस कदम उठाने औऱ तत्काल कुछ सुधारों को लागू करने पर जोर दिया है. सुरक्षा परिषद का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रहा ब्राजील, जर्मनी, जापान औऱ भारत के जी-4 समूह की तरफ से यूएन में अंतरसकारी वार्ता के दौरान भारतीय स्थाई प्रतिनिधि सैय्यद अकबरूद्दीन ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य नई व्यवस्था को बनाना है ना कि सतत केवल बात करते रहना.

बेल्जियम की अध्यक्षता में 13 फरवरी को यूएन में बुलाई गई अंतरसरकार वार्ता के दौरान सैय्यद अकबरूद्दीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में सुधारों को तत्काल आगे बढ़ाने को लेकर अधिकतर सदस्य देशों में बढ़ती अधीरता को साफ देखा जा सकता है. ऐसे में हमें उम्मीद है कि यह कवायद अपने प्रयासों को स्पष्ट रूप से निर्देशित करेगी. साथ ही अधिकतर सदस्यों की तरफ से सुरक्षा परिषद के स्थाई और अस्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने की भावना को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ा जाएगा. भारतीय प्रतिनिधी ने कहा कि किसी भी नए सुधार को लागू करने के लिए जरूरी है कि हम उन पुराने कामों को करना बंद करें जिन्हें हम बदलना चाहते हैं.

जी-4 समूह की साझा स्थिति को स्पष्ट कर रहे अकबरुद्दीन ने तात्कालिक सुधार के लिए करीब आधा दर्जन अपेक्षाओं को भी मेज पर रखा. उनका कहना था कि अंतर सरकारी वार्ता से एक समेकित वार्ता पेपर निकलना चाहिए जिसपर आगे सुधार प्रक्रिया की बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके. इसके अलावा जी-4 ने 7 जून 2019 को इस बाबत आए प्रस्ताव पत्र के तकनीकी बिंदुओं पर आगे बढ़ाने और मतभेदों को कम पर करने पर जोर दिया. जी-4 समूह ने वार्ता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शा बनाने के लिए इसके वेब-कास्टिंग और उसका समुचित रिकार्ड रखे जाने की वकालत की.

भारत समेत जी-4 मुल्कों ने संयुक्त राष्ट्र संघ के इस 75वें साल में सुधार प्रक्रिया की रफ्तार बढ़ाते हुए ठोस निर्णयों तक पहुंचाए जाने की अपेक्षा जताई.

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