नई दिल्ली: पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न की लगातार जारी घटनाओं के बीच वहां से जान बचाकर हिन्दू परिवारों के भारत आने का सिलसिला जारी है. बीते 20 दिनों के दौरान करीब 160 परिवार दिल्ली पहुंचे हैं. इन परिवारों ने भारत में शरण मांगते हुए सरकार से नागरिकता देने की मांग की है.

राजधानी दिल्ली में मजनूं का टीला इलाके स्थित गुरुद्वारे और आसपास के इलाकों में शरण लेने वाले इन परिवारों ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात का समय भी मांग रहे हैं. इन परिवारों की मदद कर रहे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा कहते हैं कि पाकिस्तान से किसी तरह जान बचाकर पहुंचे इन लोगों पर जो गुजरी है वो सुनकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं. इनके भारत आने का सिलसिला जारी है और बीते दो दिनों में ही 10 परिवार दिल्ली पहुंचे हैं. ऐसे में मानवीय आधार पर यह ज़रूरी है कि इन्हें भारत में रहने का अधिकार मिले.

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में सिरसा ने कहा कि इन परिवारों और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना से बचकर आने वाले लोगों के लिए मदद का रास्ता निकलने पर भी गृहमंत्री ने सम्भव सहायता का भरोसा दिया है. सिरसा ने इस कड़ी में बताया कि बीते दिनों पाकिस्तान के एक प्रतिष्ठित परिवार की लड़की को गृहमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आपात वीज़ा दिलवाकर मुश्किल हालात में भारत लाया गया.

अपना मुंह और सिर ढककर मीडिया से रूबरू हुए इस हिन्दू लड़की ने बताया कि अपनी आगे की पढ़ाई छोड़कर उसके पाकिस्तान से भारत आने की बड़ी वजह धार्मिक उत्पीड़न है जिसका अक्सर शिकार लड़कियां बनती हैं. पाक में पीछे छूटे अपनी परिवार की सुरक्षा-सलामती के कारण पहचान छुपाने को मजबूर इस लड़की ने कहा कि हिन्दू होना ही एक सज़ा है क्योंकि उन्हें काफिर कहा जाता है. यहां तक कि किसी हिन्दू के मर जाने पर उसे दफनाने का दबाव होता है क्योंकि उन्हें कहा जाता है कि शव को जलाने से धुँआ होगा, बदबू आएगी.

कुछ बरस पहले पाकिस्तान के सिंध से आए सुखनन्द बताते हैं कि उनके जैसे परिवार अपना घरबार छोड़कर भारत आए हैं. यहाँ झुग्गियों में बिना बिजली के रह रहे हैं लेकिन वापस जाने का कोई सवाल नहीं है. इतना ही महीन सुखनन्द पाकिस्तान में पीछे छूटे अन्य परिवारों को लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं. चंद बरस पहले इसी तरह पाकिस्तान के हैदराबाद से किसी तरह परिवार को बचाकर पहुंचे धर्मवीर और दयालदास भी ऐसी ही कहानी बयान करते हैं. सिरसा कहते हैं कि बहन बेटियों की आबरू पर बात बन आए, 6 और 8 बरस की बेटियां भी सुरक्षित न हों तो इन पाकिस्तान हमें तेजी से सिमटते हिन्दू परिवारों के पास जान बचाकर भागने के अलावा क्या चारा होगा.

भारत में आने पर भी इनकी मुश्किलें कम नहीं होती क्योंकि यहाँ इनके पास न तो अपने पहचान के सारे कागज़ात होते हैं और न ही पर्याप्त साधन. ऐसे में इन परिवारों के बच्चे आगे पढ़ भी नहीं पाते हैं. इस बारे में पूछे जाने पर मनजिंदर सिंह सिरसा का कहना था कि इसके लिए गुरुद्वारों के स्कूलों में प्रबंध करवाने का प्रयास हो रहा है. इस कड़ी में दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय से इजाजत लेने की कोशिश जारी है.

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