पटना: बिहार की सड़कों की हालत इतनी खराब है कि अब हाईकोर्ट की निगरानी में सड़कें बनवाने की नौबत आ गई है. पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या पटना-गया रोड यानी एनएच 83 पर अब बैलगाड़ी लेकर चलेंगे. आखिर चीफ जस्टिस को ऐसा क्यों कहना पड़ा?

दरअसल, पिछले साल 18 दिसंबर 2019 को चीफ जस्टिस को गया जाना पड़ा था. लेकिन सड़क की हालात इतनी खराब थी कि चीफ जस्टिस को लौटते वक्त ट्रेन का सहारा लेना पड़ा. उस वक्त काफी हंगामा हुआ था. लेकिन दो महीने बाद भी सड़क की हालात जस की तस है.

इस सड़क को बनाने का ठेका हैदराबाद की आईएलएफएसएल कंपनी को मिला था लेकिन कंपनी के दिवालिया होने की वजह से आधा अधूरा रहा गया. इसका नतीजा ये हुआ कि सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं. इसे देखने वाला कोई नहीं है. 127 किलोमीटर लंबी सड़क का 2014 में टेंडर हुआ था,. इसमें 27 सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे. आईएलएफएसएल कंपनी दो साल में नौ फीसदी काम ही पूरा कर पाई. इसके बाद से निर्माण कार्य बंद है. हालांकि, जहानाबाद के डीएम नवीन कुमार इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि एनएच-83 पर जल्द काम शुरू होगा.

वहीं इस पूरे मामले पर बिहार सरकार के मंत्री कृष्णनंदन वर्मा कहते हैं कि ठेकेदारों की लापरवाही से हम सभी परेशानी झेल रहे हैं. सड़क निर्माण को लेकर टेंडर हो गया है और तीन तीन चरण में कार्य शुरू होगा. वहीं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह ने कहा कि एनएच 83 केंद्र सरकार का मामला है. टेक्निकल वजह से काम रुक गया है. मामला नीति आयोग तक गया है.

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी सवाल उठा रहे हैं. आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि आज तक सड़क नहीं बन पाई है. अब बिहार सरकार का जो भी सरकारी प्रोजेक्ट बनता है वो तय समय में पूरा नहीं होता है. हाई कोर्ट को विभागीय मंत्री या अधिकारी को बुलाकर पूछना चाहिए कि किस वजह से काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ.

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