आसान फंडिंग और सरकारों पर दबाव बनाने के लिए कोरोना को महामारी घोषित किया गया

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नई दिल्ली. कोरोनावायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को महामारी घोषित कर दिया। इससे पहले 31 दिसंबर को चीन ने इस बीमारी को आउटब्रेक (तेजी से फैलने वाली) घोषित किया था। किसी बीमारी के असर को दिखाने के तीन चरण होते हैं। पहला आउटब्रेक (तेजी से फैलाव), दूसरा एपिडेमिक (तेजी से फैलने वाली बीमारी) और तीसरा पैनडेमिक (महामारी) है। जब बीमारी कई देशों और महाद्वीपों में फैल जाती है तो महामारी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।

महामारी यानी की पैनडेमिक शब्द ग्रीक शब्द पैन (सभी) और डेमिक (लोग) से मिलकर बना है। इसका मतलब है कि सभी लोगों को अपनी चपेट में लेने वाली बीमारी। आउटब्रेक का मतलब ऐसी बीमारी से है जो छोटे स्थान में फैली है, लेकिन जिसका फैलाव असामान्य है। एपिडेमिक का इस्तेमाल ऐसी परिस्थितियों में किया जाता है, जहां हालात नियंत्रण से बाहर हों, लेकिन बीमारी का प्रसार केवल एक देश या निश्चित स्थान पर ही हो।

महामारी घोषित करने की प्रक्रिया 

डब्ल्यूएचओ 2009 से पहले महामारी घोषित करने के लिए 6 चरणों की प्रक्रिया अपनाता था। 2009 में स्वाइन फ्लू के संक्रमण के बाद इसे बदल दिया गया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अब महामारी घोषित करने के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। किसी भी बीमारी के असर को विनाशकारी बताने के लिए उसे महामारी घोषित किया जाता है। इसके लिए मृतकों की संख्या मायने नहीं रखती। अगर कोई बीमारी कई महाद्वीपों में फैल जाती है, तो भी उसे महामारी घोषित कर दिया जाता है।

कोरोनावायरस को महामारी कहने से ये होगा:
 

1. सरकारों का ध्यान खींचने में मदद मिलेगी: डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एधोनम ने बताया कि नाम का बहुत महत्व होता है। महामारी शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया गया है कि वैश्विक स्तर पर निष्क्रियता को कम किया जा सके। इससे लोगों को सतर्क करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी बीमारी को महामारी घोषित करने से डब्ल्यूएचओ और देशों के काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं होता, लेकिन इससे सरकारों का ध्यान खींचने में ज्यादा मदद मिलती है।’’

2. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आसानी से फंडिंग मिलेगी: इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल के डॉ. बलराम भार्गव के मुताबिक महामारी की घोषणा कर देने से देश वायरस के खतरे को लेकर गंभीर होंगे। इसके साथ ही वायरस से लड़ने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से फंडिंग मिलने में आसानी होगी।

3. स्कूल, कॉलेज बंद होने के साथ इवेंट्स भी नहीं होंगे: किसी भी बीमारी से निपटने के सरकारें 2 चरणों में काम करती हैं। पहला- जब तक बीमारी नियंत्रण में लगती है, तब तक संक्रमितों को अलग रखकर उपचार किया जाता है। दूसरा- जब संक्रमण को रोकना मुश्किल हो जाता है, तो स्कूल, कॉलेज और अन्य प्रतिष्ठान बंद कर दिए जाते हैं। महामारी की घोषणा के बाद ज्यादातर सरकारें दूसरा चरण अपनाती हैं।

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