भाजपा विधायक त्रिपाठी 24 घंटे में दूसरी बार मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे, कमलनाथ विशेषज्ञों से कानूनी पहलू समझ रहे

0
90

भोपाल. मध्य प्रदेश में सत्ता के लिए शुरू हुआ संघर्ष अब कानूनी दांव-पेंच में उलझता नजर आ रहा है। गेंद अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। भाजपा की फ्लोर टेस्ट की मांग पर शीर्ष अदालत ने मंगलवार को राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। इस मामले में बुधवार को 10:30 बजे फिर सुनवाई होगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोमवार रात से ही मुख्यमंत्री आवास में डेरा जमाए हुए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और संसदीय कार्य मंत्री गोविंद सिंह के साथ कानूनी मसले समझ रहे हैं।

वहीं, मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी 24 घंटे में दूसरी बार कमलनाथ से मुलाकात करने सीएम हाउस पहुंचे। सोमवार को सीएम से मुलाकात के बाद त्रिपाठी ने कहा था कि जो मैहर को जिला बनाएगा, हम उसका समर्थन करेंगे।

अपडेट्स…

  • 1.00 PM: भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी 24 घंटे में दूसरी बार मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे।
  • 12.10 PM: मंत्री जयवर्धन सिंह, अजय सिंह और सचिन यादव भी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।
  • 11.10 AM: राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह सीएम हाउस पहुंचे।
  • 11.00 AM: मंत्री विजय लक्ष्मी साधौ मुख्यमंत्री आवास से निकलीं।
  • 10.37 AM: ब्लैक ग्लास की एसयूवी से 4 कांग्रेस विधायक सीएम हाउस पहुंचे।
  • 9.55 AM: करीब 12 खाली एसयूवी गाड़ियां सीएम हाउस के अंदर गईं।
  • सुबह शोभा ओझा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। यहां से वे सीधे महिला आयोग अध्यक्ष का चार्ज लेने ऑफिस गईं।

अब आगे क्या हो सकता है?
 

1) सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
फ्लोर टेस्ट में देरी के विरोध में भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। सुनवाई हुई। मामले की कल भी सुनवाई होगी। अगर स्पीकर अगले 10 दिन के भीतर बागी विधायकों को अयोग्य करार देते हैं तो भी मामला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है। कोर्ट में तुरंत सुनवाई हुई तो 26 मार्च से पहले भी फ्लोर टेस्ट हो सकता है।

एक्सपर्ट व्यू : संवैधानिक मामलों के जानकार फैजान मुस्तफा के मुताबिक, स्पीकर के पास दो विकल्प हैं। या तो वे विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लें या उन्हें डिस्क्वालिफाई (अयोग्य) करार दें। स्पीकर अपने फैसले को डिले कर सकते हैं, ताकि सत्ताधारी पार्टी के लोगों को बागियों को मनाने का कुछ वक्त मिल जाए। लेकिन दो विकल्पों के अलावा स्पीकर के पास कोई और चारा नहीं है।

2) क्या राष्ट्रपति शासन लगने के आसार हैं?
ये भी एक संभावना है। इसके उदाहरण भी हैं। पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के 19 दिन बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। तब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के तीन प्रमुख दलों भाजपा, शिवसेना और राकांपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन कोई भी दल सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं जुटा पाया। 12 दिन बाद रातों-रात राष्ट्रपति शासन हटा और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इससे भी पहले जून 2018 में जम्मू-कश्मीर में जब भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो पीडीपी-नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की। हालांकि, इसी बीच वहां राज्यपाल शासन लगा दिया गया।

एक्सपर्ट व्यू : फैजान मुस्तफा बताते हैं कि सरकार या स्पीकर जानबूझकर फ्लोर टेस्ट नहीं कराते तो प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का कारण बताकर राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.