अमेरिका में कोरोनावायरस से बचने के लिए 85% लोग सैनेटाइजर का इस्तेमाल कर रहे, 50% लोग प्रार्थना कर रहे हैं, मास्क सिर्फ 7% ही पहन रहे

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वॉशिंगटन/नई दिल्ली. अमेरिका में कोरोनावायरस बहुत तेजी से फैल रहा है। इसके चलते लोग अपनी रोजाना की आदतों में बदलाव कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया ने 2436 लोगों पर एक सर्वे किया है। इसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। इस सर्वे में ज्यादातर लोगों का कहना है कि कोरोना के बाद उन्होंने पहले से ज्यादा सैनेटाइजर का इस्तेमाल और हाथ धोना शुरू किया है। 50 फीसदी लोग कोरोनावायरस न फैले इसलिए प्रार्थना कर रहे हैं। 

अमेरिकी अपनी आदतों में किस तरह के बदलाव ला रहे हैं 

85% लोगों का कहना है कि वह हाथ धोने या फिर सैनेटाइजर का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं।
61% लोगों का कहना है कि वह सोशल डिस्टेंशिंग (लोगों से दूरी बनाना) बनाने पर जोर दे रहे हैं। 
50% लोगों का कहना है कि वह कोरोनावायरस नहीं फैलने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। 
22% अमेरिकी खाने-पीने का सामान और पानी स्टॉक करके रख रहे हैं। 
7% लोग फेस मास्क पहन रहे हैं। 


दुनिया के दो हिस्सों में कोरोना के केस- उम्रदराज लोगों को कोरोनावायरस का खतरा सबसे ज्यादा 
एक रिपोर्ट में दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में स्थित दो देशों का अध्य्यन किया गया है। इसमें कोरोना का असर अलग-अलग उम्र के लोगों पर अलग-अलग दिखाई दे रहा है। यह देश दक्षिण कोरिया और इटली हैं। इटली में अब तक कोरोना के 31,506 केस सामने आए हैं। 2,503 लोगों की जान गई है। दक्षिण कोरिया में कोरोना के 8,413 केस आए हैं, जबकि 84 लोगों की जान गई है। दोनों देशों में आए कोरोना केस के आंकड़ों से पता चलता है कि यह वायरस 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में ज्यादा होता है।

कोरोनावायरस को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंशिंग बेहद जरूरी
कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए पहला सबसे जरूरी काम लोगों के बीच दूरी(सोशल डिस्टेंशिंग) बढ़ाना है। ताकि लोग एक-दूसरे के संपर्क में कम से कम आएं। इससे कोरोना का ट्रांसमिशन कम होता है। इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और अमेरिका में यह देखने में सामने आया है कि यहां शुरू में सोशल डिस्टेंशिंग नहीं बढ़ाने से कोरोना के केस हर तीसरे-चौथे दिन दोगुना हो गए। 

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